पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच मध्यप्रदेश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई दो दिनों से प्रभावित है। इससे होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग कारोबार और सराफा कारीगरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं शादी समारोहों की तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं।

भोपाल। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे टकराव का असर अब भारत के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देने लगा है। मध्यप्रदेश में पिछले दो दिनों से कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टॉरेंट और कैटरिंग से जुड़े कारोबार पर पड़ा है। गैस की कमी के कारण कई जगहों पर खाना बनाने की व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे कारोबारी और उपभोक्ता दोनों ही परेशान हैं। खास तौर पर ऐसे परिवारों की चिंता बढ़ गई है जिनके घरों में आने वाले दिनों में शादी या बड़े समारोह होने वाले हैं।

अगले दिनों मे्ं एक हजार से अधिक शादियां  
व्यापारियों के अनुसार यह स्थिति लगभग आपातकाल जैसी बनती जा रही है। भोपाल में आने वाले करीब बीस दिनों के भीतर एक हजार से अधिक शादियां तय हैं। ऐसे में कैटरिंग से जुड़े लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बड़े आयोजनों में बड़ी मात्रा में गैस सिलेंडर की जरूरत होती है। गैस की सप्लाई रुकने से भोजन की तैयारी करना कठिन हो रहा है और आयोजन की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ रहा है। संकट केवल होटल और कैटरिंग व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य कई छोटे उद्योग भी इससे प्रभावित हुए हैं। 

सराफा कारीगरों के सामने भी संकट
उदाहरण के तौर पर सोना-चांदी के आभूषण बनाने वाले कारीगरों को भी गैस सिलेंडर की आवश्यकता होती है। भोपाल के सराफा बाजार से जुड़े व्यापारियों के अनुसार शहर में लगभग तीन हजार कारीगर काम करते हैं और हर कारीगर को महीने में औसतन तीन सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। इस तरह पूरे बाजार में हर महीने करीब नौ हजार सिलेंडर की खपत होती है, यानी प्रतिदिन लगभग तीन सौ सिलेंडर की जरूरत रहती है। सप्लाई बंद होने से उनका काम भी प्रभावित होने लगा है।

पारंपरिक ईंधन के विकल्प अपनाएं
इसी बीच इंदौर में प्रशासन ने एक अलग तरह का सुझाव दिया है। खाद्य विभाग के अधिकारी एमएल मारू ने कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के साथ बैठक कर उन्हें फिलहाल गैस के स्थान पर पारंपरिक ईंधन के विकल्प अपनाने की सलाह दी है। इसमें लकड़ी, कंडा और भट्ठी जैसे पुराने तरीकों का इस्तेमाल करने की बात कही गई है, ताकि जरूरी कार्यक्रमों में खाना बनाने का काम पूरी तरह बंद न हो। कैटरिंग संगठनों ने भी स्थिति को देखते हुए एक व्यावहारिक निर्णय लिया है।  कई कैटरर्स ने तय किया है कि सैकड़ों आइटम तैयार करने के बजाय करीब 15 व्यंजन ही बनाए जाएंगे।

रोजमर्रा के कारोबार पर पड़ा असर
इससे कम गैस या वैकल्पिक ईंधन में भी व्यवस्था संभाली जा सके। कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का प्रभाव स्थानीय बाजार और रोजमर्रा के कारोबार पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। यदि गैस सिलेंडरों की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं होती है तो होटल, कैटरिंग, छोटे उद्योग और आम उपभोक्ताओं को और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल व्यापारी और प्रशासन दोनों ही स्थिति को संभालने के लिए वैकल्पिक उपायों पर विचार कर रहे हैं।