Manpur Farmhouse Scandal: मध्यप्रदेश। मानपुर में आईएएस वंदना वैद्य (IAS Vandana Vaidya) के फार्महाउस का जुआकांड अब हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। सस्पेंडेड टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने हाई कोर्ट में अपने सस्पेंशन को चुनौती दी है। उनका कहना है कि, उन्हें इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि उन्होंने एफआईआर में सही जगह और सही नाम लिखने से इंकार नहीं किया।
अदालत ने मांगा जवाब
इस मामले को लेकर गुरुवार को एमपी हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने सुनवाई के बाद प्रमुख सचिव गृह विभाग, DGP और आईजी ग्रामीण समेत एसपी ग्रामीण और एडिशनल एसपी, SDOP को पक्षकार मानते हुए जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होनी है। सस्पेंडेड टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे का कहना है कि, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई शक्तियों का दुरूपयोग है।
दबाव को किया नजरअंदाज
अदालत में दायर याचिका के माध्यम से लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने स्पष्ट किया है कि, उन पर दबाव बनाया जा रहा था कि, फार्महाउस का नाम एफआईआर से हटाकर किसी अन्य स्थान का नाम लिख दिया जाए। हालांकि उनके अनुसार, उन्होंने दबाव को नजरअंदाज करते हुए एफआईआर में सभी तथ्यों को जस का तस रखा। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।
छुट्टी पर थीं ASI रेशम गिरवाल
लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने यह आरोप भी लगाए हैं कि, 'जांच भी ऐसे अधिकारियों को दी गई है जो वरिष्ठ अधिकारियों के अधीन काम करते हैं। ASI रेशम गिरवाल को भी सस्पेंड किया गया जबकि वे 21 फरवरी से बीमारी के कारण छुट्टी पर थीं। बिना जांच के सस्पेंड करने का फैसला लिया गया।' हिहोरे का कहना है कि, कार्रवाई के समय उन्हें नहीं पता था कि, फार्महाउस आईएएस वंदना का है। जैसे ही उन्हें यह पता चला उन्हें फोन और मेसेज आना शुरू हो गए।
क्या है मामला
दरअसल 10-11 मार्च की रात मानपुर स्थित एक फार्महाउस में जुआरियों को पकड़ने के बाद 11 मार्च को एसपी यांगचेन डोलकर ने कुछ पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया था। इनमें टीआई लेकेन्द्र सिंह, एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल शामिल थे। अब मामला हाई कोर्ट में चला गया है। 1 अप्रैल को फार्महाउस जुआ कांड में निर्णायक मोड़ आ सकता है।