भोपाल। सूबे की राजधानी में शुक्रवार, 13 फरवरी को प्रशासनिक स्तर पर अहम गतिविधि देखने को मिलेगी। प्रदेश के सभी 55 जिलों के कलेक्टर, 12 संभागों के आयुक्त और 16 नगर निगम आयुक्त एक मंच पर जुटेंगे। यह बैठक आगामी जनगणना की तैयारियों को बेहतर ढंग से लागू करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। इतने बड़े पैमाने पर अधिकारियों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि सरकार इस राष्ट्रीय कार्य को लेकर पूरी गंभीरता दिखा रही है।
इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। गृह विभाग की ओर से सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अनिवार्य रूप से भाग लें।
माना जा रहा है कि इस अवसर पर राज्य स्तर पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि जनगणना प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 1 मई से मकानों की गणना का पहला चरण शुरू होने जा रहा है। इसके तहत घर-घर जाकर आवासीय जानकारी दर्ज की जाएगी।
इस बार पूरी प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। पारंपरिक फॉर्म और कागजी रिकॉर्ड की जगह मोबाइल एप और विशेष ऑनलाइन पोर्टल्स के माध्यम से डेटा संग्रह किया जाएगा। अधिकारियों को इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन और निगरानी के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बैठक में गणना कर्मियों की नियुक्ति, उनके प्रशिक्षण, बजट आवंटन और संसाधन प्रबंधन जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी और प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में काम के दौरान आने वाली समस्याओं-जैसे नेटवर्क की कमी या स्थानीय सहयोग-से निपटने की रणनीति पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।
प्रश्नावली की संरचना और डेटा संकलन की एकरूपता सुनिश्चित करने पर भी जोर रहेगा। हालांकि यह चर्चा भी सामने आई है कि प्रदेश में स्थाई निदेशक के बिना ही तैयारियां चल रही हैं, फिर भी प्रशासन इसे सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में लगा है। कुल मिलाकर, भोपाल में होने वाली यह उच्च स्तरीय बैठक जनगणना को तकनीकी रूप से सक्षम और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
(एपी सिंह की रिपोर्ट)
