खंडवा। सूरजकुंड क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के बाद मुआवजे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर जिला प्रशासन और प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने प्रभावित लोगों को राहत का आश्वासन दिया है, वहीं दूसरी ओर रेलवे ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया है। इस विरोधाभास के चलते हजारों प्रभावित परिवारों में नाराजगी और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें मुआवजा दिलाने की कोशिश की जाएगी। जबकि रेलवे अधिकारियों का दावा है कि जमीन उनकी है, इसलिए मुआवजा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। इस मुद्दे ने अब प्रशासन और रेलवे के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर बहस छेड़ दी है।
उजड़ी बस्ती, बेघर हुए सैकड़ों परिवार
खंडवा रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह क्षेत्र लंबे समय से घनी आबादी वाला इलाका था। सूरजकुंड वार्ड में करीब 1500 परिवार यहां सालों से रह रहे थे।
हाल ही में रेलवे द्वारा चलाए गए अभियान में इन मकानों को हटाया गया। कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए और उनका जीवन प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से यहां रह रहे थे और कई के पास दस्तावेज भी थे। अचानक हुई कार्रवाई ने उन्हें संकट में डाल दिया है। अब ये परिवार मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन ने दिया मुआवजे का भरोसा
कार्रवाई के बाद लोगों में आक्रोश बढ़ने लगा, जिसे देखते हुए प्रशासन सक्रिय हुआ। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने प्रभावित परिवारों को आश्वस्त किया कि उनके मामलों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिनके पास वैध पट्टे या दस्तावेज हैं, उन्हें राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इस काम के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने भी इसी तरह का आश्वासन दोहराया। इससे प्रभावित लोगों को कुछ हद तक उम्मीद जगी है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि मुआवजा किस स्तर से मिलेगा।
रेलवे का स्पष्ट रुख, मुआवजा नहीं देंगे
रेलवे प्रशासन ने इस मामले में अपनी स्थिति साफ कर दी है। भुसावल मंडल के डीआरएम पुनीत अग्रवाल ने कहा कि संबंधित जमीन रेलवे की है। उनके अनुसार, इस भूमि पर लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण किया था। अब रेलवे को अपनी जमीन की जरूरत होने पर अतिक्रमण हटाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुआवजा केवल जमीन अधिग्रहण के मामलों में दिया जाता है। यह मामला अतिक्रमण हटाने का है, इसलिए रेलवे मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं है। पट्टे यदि स्थानीय प्रशासन ने दिए हैं तो वहां का लोकल प्रशासन और राज्य सरकार ही लोगों को राहत दे सकती हैं।