Ken Betwa Project: केन-बेतवा प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने 3 दिनों से बांध का निर्माण रोक रखा है। छतरपुर के कलेक्टर ने कहा, "हम बातचीत कर रहे हैं, मुआवजे की प्रक्रिया 90% पूरी हो चुकी है। हम उनकी गैर-कानूनी मांगों को नहीं मानेंगे।" प्रशासन द्वारा मांगे न माने जाने पर शनिवार को बांध निर्माण स्थल पर करीब 5000 ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया।
जानकारी सामने आई है कि, छतरपुर में आदिवासी लोग शनिवार को चिलचिलाती धूप में अपनी जमीन, नदी, जंगल के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। छतरपुर और पन्ना में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और तेज हो गया है। लगभग 5,000 आदिवासी चिता पर लेटकर न्याय की मांग कर रहे हैं और "हमें न्याय दो या हमें मौत दो" जैसे नारे लगा रहे हैं।
जय किसान संगठन कर रहा प्रदर्शन का नेतृत्व
बांध निर्माण स्थल 'धोधन' पर छोटे-छोटे अस्थायी तंबू लगाए गए हैं। पिछले तीन दिनों से आदिवासी वहीं रह रहे हैं। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व 'जय किसान संगठन' के अमित भटनागर कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि, पुलिस और वन विभाग के अधिकारी विरोध स्थल तक भोजन, पानी और जरूरी सामान पहुनचने से रोक रहे हैं। आरोप है कि, स्थानीय ग्रामीणों और दुकानदारों को धमकाया जा रहा है कि वे प्रदर्शनकारियों की मदद न करें।
जल, जंगल, जमीन की लड़ाई
विरोध प्रदर्शन को हटाने की कोशिशों के दौरान पुलिस और महिला प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं हैं। भटनागर ने कहा, "यह सिर्फ मुआवजे की बात नहीं है। यह हमारे जल, जंगल, जमीन और संस्कृति को बचाने की लड़ाई है।"
ग्रामीणों को मुआवजा मिल चुका है- कलेक्टर
जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों में से लगभग 90% को मुआवजा पहले ही मिल चुका है। उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगें 'गैर-कानूनी' हैं और पाबंदियों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
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