जबलपुर। एक साल पुराने मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर मृतक का शव कब्र से बाहर निकाला गया। यह कार्रवाई प्रशासन की निगरानी में पूरी की गई। बुधवार को एसडीएम अधारताल की उपस्थिति में कब्र खोदकर शव बाहर निकाला गया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेजा गया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पूरी प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पूरी की जाए, ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके। यह मामला गयासुद्दीन कुरैशी की मौत से जुड़ा है, जिनका निधन मार्च 2025 में हुआ था और बाद में उन्हें दफना दिया गया था।
हाईकोर्ट का सख्त रुख, देरी पर नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि जांच में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। न्यायालय की डिवीजन बेंच ने आदेश दिया था कि तय समय तक शव को कब्र से निकालकर उसी दिन पोस्टमार्टम कराया जाए। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि पूरी कार्रवाई मजिस्ट्रेट की निगरानी में पारदर्शी तरीके से संपन्न हो। इसके साथ ही मृतक के परिजनों को भी प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे, ताकि किसी तरह का विवाद न हो।
परिवार ने जताई थी हत्या की आशंका
इस पूरे मामले की शुरुआत मृतक के भाई द्वारा लगाए गए आरोपों से हुई। उन्होंने मौत को संदिग्ध बताते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। भाई का कहना था कि शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में कुछ ऐसे संकेत मिले थे, जो सामान्य दुर्घटना से अलग स्थिति दर्शाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को शिकायत देने के बावजूद भी मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी कारण उन्होंने जनवरी 2026 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोबारा जांच की मांग की थी।
सड़क हादसे के बाद हुई थी मौत
जानकारी के अनुसार, गयासुद्दीन कुरैशी 26 मार्च 2025 को सड़क दुर्घटना में घायल हुए थे। उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में नागपुर रेफर किया गया था। अगले ही दिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद बिना विस्तृत पोस्टमार्टम जांच के शव को दफना दिया गया। अब कोर्ट के आदेश के बाद शव को बाहर निकालकर दोबारा परीक्षण कराया जा रहा है, जिससे मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि न्यायिक हस्तक्षेप से पुराने मामलों में भी सच्चाई सामने लाई जा सकती है।