इंदौर में पीएनजी गैस संकट गहराने से उद्योगों पर भारी असर पड़ा है। गैस के दाम दोगुने और सप्लाई आधी होने से करीब 400 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर हैं। जानें कैसे यह संकट एमएसएमई सेक्टर और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।

इंदौर। मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर इन दिनों एक बड़े ऊर्जा संकट से जूझ रही है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की कीमतों में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी और सप्लाई में कटौती ने उद्योगों के सामने गंभीर चुनौती पैदा कर दी है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब स्थानीय उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। जो पीएनजी कभी एलपीजी का सस्ता और सुविधाजनक विकल्प माना जाता था, वही अब उद्योगपतियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। गैस सप्लाई करने वाली कंपनी द्वारा कीमतें बढ़ाने और खपत पर सीमा तय करने से उत्पादन पर असर पड़ा है। 

गैस के दाम दोगुने, सप्लाई पर कोटा 
स्थिति यह है कि करीब 400 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। पिछले कुछ दिनों में पीएनजी के दामों में अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला है। जहां पहले गैस की कीमत लगभग 50 से 55 रुपए प्रति यूनिट थी, अब यह बढ़कर करीब 100 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गई है। यानी सीधे तौर पर कीमतों में करीब 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही गैस सप्लायर कंपनी ने खपत की एक सीमा भी तय कर दी है। अगर कोई उद्योग निर्धारित सीमा से अधिक गैस उपयोग करता है, तो उसे अतिरिक्त दर पर भुगतान करना पड़ता है।

उद्योगों पर बढ़ा लागत का दबाव 
गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि पहले ही बाजार में मांग कमजोर है, ऐसे में बढ़ती लागत ने हालात और खराब कर दिए हैं। अब कंपनियों के लिए पुराने रेट पर उत्पादन करना संभव नहीं रह गया है। इसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, क्योंकि उत्पाद महंगे होंगे। कई यूनिट्स ने उत्पादन कम कर दिया है, जबकि कुछ बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं।

एमएसएमई के लिए संकट की स्थिति 
इंदौर के छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर मानी जा रही है। उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार ने पहले उन्हें एलपीजी सिलेंडर छोड़कर पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया था। अब जब सभी यूनिट्स पूरी तरह PNG पर निर्भर हो गई हैं, तो सप्लाई कंपनी मनमाने फैसले ले रही है। कई उद्योगों को डर है कि अगर यही स्थिति रही तो उन्हें काम बंद करना पड़ेगा। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले समय में गैस की कीमत 130 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच सकती है।

सिक्योरिटी डिपाजिट की नई परेशानी 
उद्योगपतियों ने यह भी आरोप लगाया है कि गैस कंपनी अब सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर अतिरिक्त पैसा मांग रही है। जो डिपॉजिट कुछ साल पहले जमा किया गया था, उसे अब अपर्याप्त बताया जा रहा है। कंपनी 40 दिनों के औसत बिल के बराबर नई राशि जमा करने के लिए कह रही है। उद्योगों का कहना है कि अगर यह राशि जमा नहीं की गई, तो सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी जा रही है। इससे पहले से परेशान उद्योगों पर और अधिक आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग 
ईंधन को लेकर बढ़ती समस्याओं को देखते हुए स्थानीय उद्योगपतियों ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उद्योगपतियों का उनका कहना है कि मौजूदा हालात में उद्योग चलाना मुश्किल हो रहा है। यदि जल्द इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला गया, तो बड़े स्तर पर उद्योग बंद हो सकते हैं। इसका असर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों जगह देखने को मिलेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाती हैं।