भोपाल। हमीदिया अस्पताल में एक बार फिर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गर्भवती महिला की आपात स्थिति में डिलीवरी कराई गई। इसके बाद डॉक्टरों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया। कुछ समय बाद शिशु के शरीर में हलचल दिखाई दी तो परिजनों में जीवित शिशु को मृत बताने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया।
चार दिनों में यह ऐसी दूसरी घटना
हमीदिया अस्पताल में बीते 4 दिनों में यह ऐसी दूसरी घटना है। जानकारी के अनुसार, करीब 6 माह की गर्भवती महिला गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थी। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल प्रसव कराने का निर्णय लिया। डिलीवरी के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को मृत बताया, पर कुछ देर बाद परिजनों को उसमें हरकत दिखाई दी। इसी को लेकर विवाद शुरू हो गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात काबू करने के लिए अस्पताल प्रबंधन को पुलिस बुलानी पड़ी।
अस्पताल ने बताया यह एबॉर्टस का केस
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि यह मामला एबॉर्टस यानी अत्यंत प्री-मैच्योर डिलीवरी का है। डॉक्टरों के मुताबिक, जब गर्भ 20 सप्ताह से पहले खत्म हो जाता है या भ्रूण का वजन बहुत कम होता है, तो उसके अंग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। विशेष रूप से फेफड़ों का विकास अधूरा होने के कारण ऐसे शिशु सामान्य रूप से सांस नहीं ले पाते। उनके जीवित रहने की संभावना लगभग नहीं होती है।
ऐसे केसों में जन्म के बाद दिखती है हलचल
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में जन्म के बाद कुछ समय के लिए शरीर में हल्की गतिविधियां दिखाई दे सकती हैं। यह शरीर की स्वाभाविक जैविक प्रतिक्रिया होती है, जिसे अक्सर लोग जीवन का संकेत समझ लेते हैं। इसी वजह से कई बार गलतफहमी पैदा हो जाती है और विवाद की स्थिति बन जाती है। इस स्थिति में डिलीवरी टालना संभव नहीं होता, क्योंकि ऐसे करने से मां की जान को खतरा हो सकता था।