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ग्वालियर संभाग के कमिश्नर मनोज खत्री ने गुना में डीपीसी पर बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने कलेक्टर की फर्जी टीप लगाकर आदेश जारी करने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में कमिश्नर ने निलंबित कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर-

गुना। ग्वालियर संभाग के कमिश्नर मनोज खत्री ने जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) ऋषि कुमार शर्मा को निलंबित कर दिया है। यह कदम कलेक्टर द्वारा भेजी गई विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं, कार्य में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए थे। जांच में सामने आया कि स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए स्वीकृत राशि समय पर जारी नहीं की गई। ग्वालियर संभाग के कमिश्नर मनोज खत्री ने यह कार्रवाई कलेक्टर की शिकायत के आधार पर की। 

 वित्तीय अनियमितताओं के संकेत
कलेक्टर ने मार्च 2025 में कई स्कूलों के लिए फंड जारी करने की मंजूरी दी थी, लेकिन संबंधित अधिकारी ने देर से कुछ एजेंसियों को ही भुगतान के लिए चेक तैयार किए। कुछ मामलों में तो स्वीकृति के बाद लगभग 16 महीने तक भुगतान लंबित रखा गया। कमिश्नर के आदेश में स्पष्ट किया गया कि इस तरह की देरी केवल कार्य में ढिलाई नहीं, बल्कि वित्तीय गड़बड़ी की श्रेणी में आती है। समय पर राशि जारी न होने से निर्माण कार्य प्रभावित हुए और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन भी धीमा पड़ गया। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं।

निरीक्षण में लापरवाही-बिना सूचना गैरहाजिरी
कलेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार, डीपीसी द्वारा क्षेत्रीय निरीक्षण भी नियमित रूप से नहीं किया जा रहा था। इसके चलते शिक्षा विभाग से जुड़े कई नकारात्मक मामले सामने आए, जिससे जिले की छवि प्रभावित हुई। साथ ही, अधिकारी कई बार बिना पूर्व सूचना के कार्यालय से अनुपस्थित भी रहे, जो सेवा नियमों का उल्लंघन माना गया। एक अन्य गंभीर आरोप यह भी है कि संबंधित अधिकारी ने स्थानांतरण से जुड़े एक आदेश में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। 

नियमों के विपरीत आदेश जारी करने का आरोप
यहां तक कि उन्होंने कलेक्टर की स्वीकृति जैसी टीप खुद ही अंकित कर आदेश जारी कर दिया, जो प्रशासनिक नियमों के खिलाफ है। इस प्रकार की कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि अधिकारों का दुरुपयोग किया गया। इनको गंभीर मामला मानते हुए कलेक्टर ने उच्च स्तर पर कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद कमिश्नर ने जांच के आधार पर डीपीसी को निलंबित कर दिया। यह कदम प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने और अन्य अधिकारियों को अनुशासन का संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।

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