प्रदेश में कॉलेजों को अब केवल 1000 रुपए में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की अनुमति मिलेगी। उच्च शिक्षा विभाग के फैसले से छात्रों को डिग्री के साथ स्किल आधारित कोर्स करने का मौका मिलेगा और फीस का बोझ भी कम होगा।

भोपाल। उच्च शिक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है, जिसके तहत कॉलेजों में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया अब काफी सस्ती हो जाएगी। पहले इन कोर्सों की स्वीकृति लेने के लिए कॉलेजों को विश्वविद्यालयों को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक शुल्क देना पड़ता था, लेकिन अब यह शुल्क घटाकर मात्र एक हजार रुपए कर दिया गया है। इस बदलाव से कॉलेजों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी और छात्रों पर भी फीस का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।  

पहले देना पड़ता था भारी-भरकम शुल्क
दरअसल, पहले जब कोई कॉलेज नया यूजी या पीजी स्तर का डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करना चाहता था, तो उसे विश्वविद्यालय से अनुमति लेने के लिए भारी शुल्क देना पड़ता था। कई मामलों में यह राशि 25 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपए से अधिक तक पहुंच जाती थी। कॉलेज प्रबंधन इस खर्च को पूरा करने के लिए कोर्स की फीस बढ़ाकर छात्रों से वसूल करता था। इस वजह से ऐसे रोजगारोन्मुखी कोर्स पढ़ना कई छात्रों के लिए महंगा साबित होता था। अब राज्य के प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए स्वीकृति शुल्क को लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया है।

पहले से 99 फीसदी घटाया गया शुल्क 
 नई व्यवस्था के तहत कॉलेजों को केवल एक हजार रुपए का भुगतान करके डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की अनुमति मिल सकेगी। इसका मतलब है कि पहले की तुलना में लगभग 99 प्रतिशत तक शुल्क में कमी की गई है। यह निर्णय विभाग की स्थायी समिति की बैठक में लिया गया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति भी शामिल थे। इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने की प्रक्रिया को आसान बनाना और विद्यार्थियों को अतिरिक्त कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। 

छात्रों को मिलेंगे रोजगार के बेहतर विकल्प
डिग्री कोर्स के साथ अगर छात्र कोई डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स भी करते हैं, तो उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। इससे पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक कौशल विकसित करने का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि फीस कम होने के बाद कॉलेज अधिक संख्या में ऐसे कोर्स शुरू करने के लिए आगे आएंगे। इससे विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण पाने का मौका मिलेगा। कई ऐसे कोर्स होते हैं जो सीधे रोजगार या स्वरोजगार से जुड़े होते हैं, जैसे आईटी, डिजाइन, प्रबंधन या अन्य तकनीकी क्षेत्र। इसके अलावा राज्य सरकार भी इन कोर्सों को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है।