भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने पीजी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाओं की तारीख घोषित कर दी है। परीक्षाएं 24 फरवरी से 2 मार्च तक आयोजित होंगी। प्रवेश प्रक्रिया में देरी और छात्रों के डेटा में त्रुटियों के कारण इस बार शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित हुआ है।

भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों (पीजी) के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाओं का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार दो वर्षीय और एक वर्षीय पीजी कोर्स की परीक्षाएं 24 फरवरी से आरंभ होकर 2 मार्च तक चलेंगी। विश्वविद्यालय की समय सारणी के अनुसार सभी विषयों की परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच आयोजित की जाएंगी। इस घोषणा के बाद विद्यार्थियों में परीक्षा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।

दो पेपरों के बीच रहेगा एक दिन का अंतर  
कार्यक्रम के मुताबिक एमए, एमएससी, एमकॉम, एमएचएससी और एमएसडब्ल्यू जैसे पाठ्यक्रमों के प्रथम सेमेस्टर के प्रश्नपत्र निर्धारित तिथियों पर लिए जाएंगे। विश्वविद्यालय ने सुनिश्चित किया है कि दो पेपरों के बीच एक दिन का अंतर रखा जाए, ताकि छात्रों को तैयारी का समय मिल सके। बीएड प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा 5 मार्च से शुरू होगी, जबकि एमएड प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा 20 फरवरी से शुरू होगी।  

परीक्षा के कार्यक्रम में इस बार हुई देरी
इन परीक्षाओं के आयोजन में इस वर्ष अपेक्षाकृत देरी हुई है। देरी का मुख्य कारण उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेश प्रक्रिया को निर्धारित समय से अधिक अवधि तक जारी रखना बताया जा रहा है। प्रवेश प्रक्रिया 6 सितंबर तक चलती रही, जिससे शैक्षणिक गतिविधियों का कैलेंडर प्रभावित हुआ। प्रवेश से संबंधित समस्त जानकारी समय पर विश्वविद्यालयों तक नहीं पहुंच पाई, जिसके कारण आगे की प्रक्रियाएं भी विलंबित हो गईं।

समय से नहीं मिली छात्रों से जुड़ी जानकारी
दरअसल, उच्च शिक्षा विभाग के विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) तुलसीराम दहायत द्वारा विश्वविद्यालय के छात्रों से संबंधित आंकड़े मांगे गए थे। यह प्रक्रिया देर तक चलती रही। प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का डाटा विश्वविद्यालयों को समय पर उपलब्ध नहीं हो सके। जो जानकारी भेजी गई, उसमें भी कई त्रुटियां पाई गईं। गलत नामांकन और अपूर्ण विवरण के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन को रिकॉर्ड सुधारने में काफी समय लग गया। 

खामियों को ठीक करने में लगा ज्यादा समय
डाटा में मौजूद खामियों को ठीक करने के लिए विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रयास करने पड़े। त्रुटिपूर्ण नामांकन को संशोधित करना आसान नहीं था, क्योंकि प्रत्येक छात्र के विवरण की अलग-अलग जांच करनी पड़ी। इसी कारण प्रथम सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म खोलने में भी बाधाएं उत्पन्न हुईं। कई अन्य विश्वविद्यालय भी इसी तरह की समस्या से जूझते रहे और उन्हें भी रिकॉर्ड दुरुस्त करने में समय लगा।

विवि ने कहा अब नहीं होगी कोई परेशानी
इन सभी प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद अब परीक्षाओं की तारीखें तय कर दी गई हैं। हालांकि देरी के कारण छात्रों को अपने अध्ययन कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा, फिर भी अब वे निर्धारित समय-सारणी के अनुसार परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रवेश प्रक्रिया और डाटा प्रबंधन में समन्वय की कमी का सीधा असर शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि अब परीक्षाओं में कोई व्यवधान बाकी नहीं है।