भोपाल में वसुंधरा राजे के कथित वायरल पत्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। MP कांग्रेस IT सेल के 3 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिस पर विवेक तन्खा ने कड़ी आपत्ति जताई। मामला अब कानूनी लड़ाई तक पहुंच सकता है।

भोपाल में एक वायरल पत्र ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से प्रसारित कथित पत्र को लेकर मध्यप्रदेश में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है। कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है।

कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी है, जिससे मामला अब सियासी के साथ-साथ कानूनी मोड़ भी लेता दिख रहा है।

पुलिस पर विवेक तन्खा ने उठाए सवाल
विवेक तन्खा ने कहा कि अगर कार्यकर्ताओं को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो उनकी लीगल टीम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई है। तन्खा का कहना है कि बिना स्पष्ट कारण के इतने लंबे समय तक हिरासत में रखना गलत है। उन्होंने मुख्यमंत्री और डीजीपी को टैग करते हुए इस पर जवाब मांगा है। उनके अनुसार यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ जाती है। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

फर्जी पत्र के मुद्दे पर उठा विवाद 
तन्खा ने यह भी कहा कि यह कथित पत्र कई दिनों से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा था। 15-16 अप्रैल से यह पत्र सार्वजनिक रूप से वायरल था और लाखों लोगों ने इसे देखा। बाद में 18 अप्रैल को इसे फर्जी बताया गया, जिसके बाद कार्रवाई शुरू हुई। ऐसे में सवाल उठता है कि पहले इसे रोकने की कोशिश क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि इस आधार पर गिरफ्तारी करना न्यायसंगत नहीं लगता। यह मामला अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी दोनों से जुड़ गया है। राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

अभिनव बारोलिया की फेसबुक पोस्ट

कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया और मांगें 
कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब वही सामग्री हजारों-लाखों लोगों ने साझा की है, तो कार्रवाई केवल कुछ लोगों पर ही क्यों हो रही है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर पत्र गलत है तो सभी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। और यदि इसमें सच्चाई है तो उसे दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने खुद पर भी एफआईआर दर्ज करने की चुनौती दी है। इस बयान से विवाद और अधिक बढ़ गया है।

वसुंधरा बोलीं-यह शुभचिंतकों की कारगुजारी
एमपी कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने इसे अवैध और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। साथ ही कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी है और जरूरत पड़ने पर अदालत जाएगी। वहीं वसुंधरा राजे ने वायरल पत्र को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि वायरल पत्र शुभचिंतकों की कारगुजारी मात्र है। इसका सच्चाई से कोई संबंध नहीं है। राजे ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार के प्रयासों का समर्थन दोहराया।