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भोपाल की बड़ी झील को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रशासन आज सोमवार से बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। इस दौरान कैचमेंट एरिया के सभी अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलेगा।

भोपाल। शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली बड़ी झील को बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। झील के कैचमेंट एरिया में तेजी से बढ़ते अतिक्रमणों पर अब बुलडोजर चलाया जाएगा। शनिवार को टास्क फोर्स की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि बिना किसी भेदभाव के सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे। एडीएम अंकुर मेश्राम ने बताया कि कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत होगी। पहले दिन सोमवार को पुलिस बल, जिला व नगर निगम प्रशासन सहित अन्य विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों के मौजूदगी में अतिक्रमणों को तोड़ा जाएगा।

पहले हालिया अतिक्रमण पर निशाना
प्रशासन ने कार्रवाई की शुरुआत हाल के सालों में हुए अतिक्रमणों से करने की योजना बनाई है। विशेष रूप से 16 मार्च 2022 के बाद बनाए गए निर्माण पहले तोड़े जाएंगे। इसके लिए पुलिस बल और नगर निगम सहित कई विभागों की टीम मौके पर तैनात रहेगी। पहले दिन टीटी नगर क्षेत्र में अभियान शुरू किया जाएगा। हालांकि 7, 8 और 9 अप्रैल को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्रवाई स्थगित रहेगी। इसके बाद 10 अप्रैल से फिर से अभियान तेज किया जाएगा, जो 21 अप्रैल तक जारी रहेगा। इस दौरान टीटी नगर और बैरागढ़ क्षेत्रों में लगातार अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चलेगी।

एफटीएल सीमा के निर्माण होंगे ध्वस्त 
झील के संरक्षण के लिए प्रशासन ने एफटीएल (फुल टैंक लेवल) सीमा के भीतर किए गए निर्माणों को चिन्हित किया है। शहरी क्षेत्र में 50 मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर की परिधि के भीतर बने सभी अवैध ढांचे हटाए जाएंगे। फरवरी और मार्च में हुए सीमांकन के दौरान जिन-जिन जगहों पर लाल निशान लगाए गए हैं, उन सभी पर बुलडोजर कार्रवाई तय है। पहले नए निर्माण हटाने के बाद पुराने अतिक्रमणों पर भी सख्ती दिखाई जाएगी।

रसूखदारों के कब्जों पर भी कार्रवाई 
बड़ी झील के आसपास कई प्रभावशाली लोगों द्वारा अवैध कब्जे किए गए हैं। इनमें पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, कारोबारी और अन्य प्रभावशाली वर्ग शामिल हैं। इन लोगों ने करोड़ों की लागत से बंगले, होटल, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खड़े कर लिए हैं। 
भदभदा और वन विहार रोड जैसे इलाकों में भी कई निर्माण कैचमेंट क्षेत्र में आ चुके हैं। यहां तक कि कुछ सरकारी परियोजनाएं भी इस दायरे में पाई गई हैं। प्रशासन का कहना है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे।

ग्रामीण इलाकों में भी होगी सख्ती 
बैरागढ़ और आसपास के गांवों में भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण सामने आए हैं। खानूगांव, लालघाटी, हलालपुर, बोरवन और भैसाखेड़ी जैसे क्षेत्रों में मैरिज गार्डन, गोदाम और कारखानों का निर्माण किया गया है। इन निर्माणों से निकलने वाला गंदा पानी झील में पहुंच रहा है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे जलीय जीवों और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भी इन अतिक्रमणों को हटाने के निर्देश दे चुका है।

झुग्गियों-बड़े ढांचों पर भी चलेगा बुलडोजर 
प्रशासन ने छोटे और बड़े सभी प्रकार के अतिक्रमणों को सूचीबद्ध किया है। बोरवन क्षेत्र में करीब 80 झुग्गियां और बेहटा गांव में लगभग 100 झुग्गियों को हटाने की तैयारी है। इसके अलावा खानूगांव में बन रहे एक बड़े गोदाम को भी चिन्हित किया गया है, जिस पर पहले ही लाल निशान लगाया जा चुका है। कुल मिलाकर बैरागढ़ नजूल क्षेत्र में 241 अवैध कब्जे चिन्हित किए गए हैं, जिन पर क्रमवार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान झील को बचाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

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