अनूपपुर के कोतमा में इमारत गिरने के बाद 19 घंटे से रेस्क्यू जारी है। 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि NDRF-SDRF समेत 100 लोग सर्च ऑपरेशन में जुटे हैं।

मध्यप्रदेश। अनूपपुर जिले के कोतमा में शनिवार रात एक इमारत ढह गई थी। 19 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। 100 से ज्यादा लोग मलबे के नीचे दबे लोगों को तलाश रहे हैं। दो लोगों की मौत हुई है। रविवार सुबह रेस्क्यू टीम को एक महिला का शव मलबे से मिला है। इस तरह मृतकों की संख्या तीन हो गई है। मृतक महिला की पहचान नहीं हो पाई। इधर मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए सहायता राशि का ऐलान किया है जिसके अनुसार हर मृतक के परिवार को 9-9 लाख रुपए की सहायता मिलेगी।

सीएम ने किया सहायता राशि का ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर ट्वीट किया - 'कल कोतमा, अनूपपुर में हुए दुखद हादसे में काल-कवलित नागरिकों के परिजनों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान से ₹4-4 लाख, संबल योजना के अंतर्गत ₹4-4 लाख एवं रेडक्रॉस से ₹1-1 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घायलों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान से ₹2-2 लाख एवं रेडक्रॉस से ₹50-50 हजार राशि दी जाएगी। राज्य सरकार प्रभावित परिजनों के साथ खड़ी है। ईश्वर से दिवंगतों की शांति और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना है।'

मृतकों के परिजनों के लिए सहायता राशि का ऐलान

अनूपपुर जिलाधिकारी हर्षल पंचोली ने बताया था कि, "5 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। जिसमें से 2 लोगों की मृत्यु हो गई है और 3 लोगों का इलाज चल रहा है। NDRF-SDRF की टीम और जिला प्रशासन यहां रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटा हुआ है।"

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग मिलकर मलबे को हटाने का काम कर रहे हैं। जेसीबी मशीन भी यहां रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाई गई है। सर्चिंग के लिए भिलाई और बनारस की टीम बुलाई गई है। 

कैसे हुआ हादसा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जो बिल्डिंग गिरी उसके पास में ही निर्माण कार्य हो रहा था। इसके लिए 12 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। इस गड्ढे में पानी भर गया था जिससे नींव कमजोर हो गई। इसी के चलते बिल्डिंग गड्ढे की ओर झुककर भरभरा कर गिर गई। निर्माण कार्य की अनुमति ली गई थी या नहीं अभी इस बात की जांच की जाएगी।

हादसे के चलते बाजार बंद
बता दें कि, कोतमा बस स्टैंड के पास यह हादसा हुआ है। मलबे के कारण यहां की बैरिकेडिंग की गई है। इसके चलते दुकानें भी बंद है। लोगों का कहना है कि, शनिवार को बाजार बंद रहता है इसी कारण जनहानि कम हुई। अगर बाजार खुला होता तो अधिक लोगों की जान जा सकती थी।