भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में चल रहे युवा विधायक सम्मेलन इस बार सिर्फ एक औपचारिक बैठक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह नए जनप्रतिनिधियों के लिए सीख और आत्ममंथन का मंच बन गया। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से आए करीब 45 युवा विधायकों ने दूसरे और अंतिम दिन यहां बदलते राजनीतिक माहौल और अपनी जिम्मेदारियों पर खुलकर चर्चा की। सम्मेलन में सीएम मोहन यादव ने कहा कि राजनीति में टिके रहने के लिए जमीन से जुड़ाव जरूरी है।
जनता से संवाद करें युवा विधायक
उन्होंने युवा नेताओं को नसीहत दी कि वे जनता के बीच नियमित रूप से जाएं और उनकी समस्याओं को सुनें और समझें। उन्होंने कहा कि सिर्फ उपलब्धियों का बखान करना ही काफी नहीं है, बल्कि खामियों को पहचानकर सुधार करना भी उतना ही जरूरी है। सीएम ने जोर दिया कि आने वाले समय में भारत वैश्विक स्तर पर और मजबूत भूमिका निभाने वाला है, ऐसे में जनप्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी।
राजनीति में युवा भागीदारी जरूरी
वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने युवाओं की राजनीति में भागीदारी को लेकर अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने छात्रसंघ चुनावों को फिर से शुरू करने की वकालत करते हुए कहा असली नेतृत्व की नींव कॉलेज के दिनों में ही पड़ती है। युवाओं के भीतर बदलाव की ऊर्जा होती है, जिसे सही मंच और दिशा मिलने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
सजग विपक्ष लोकतंत्र की ताकत
राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि विरोध होना जरूरी है, लेकिन वह तथ्यों और तर्कों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने विधायकों को सलाह दी कि वे सदन में गंभीरता से भाग लें और अनुभवी नेताओं से सीखने का प्रयास करें। उनके मुताबिक, जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर संवाद ही लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
लोकनृत्यों से अतिथियों का स्वागत
सम्मेलन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक भी देखने को मिली, जहां पारंपरिक लोक नृत्य के जरिए अतिथियों का स्वागत किया गया। दो दिवसीय इस आयोजन में अलग-अलग सत्रों के माध्यम से नागरिक भागीदारी, सुशासन और विकसित भारत 2047 जैसे विषयों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान देश के विकास में युवा विधायकों की भूमिका और उनकी चुनौतियों पर विशेष रूप से फोकस रहा।