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नरेन्द्र वत्स, रेवाड़ी: 2019 के विधानसभा चुनावों में टिकट नहीं मिली, तो पूर्व विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने भाजपा से बगावत करते हुए चुनाव मैदान में ताल ठोक दी थी। इस बार उन्हें रेवाड़ी सीट पर भाजपा की टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, परंतु टिकट उन्हें नसीब नहीं हो सकी। इस बार पार्टी से बगावत का रास्ता अपनाने की बजाय कापड़ीवास शांत मिजाज से हलके के प्रमुख प्रत्याशियों की मौजूदा स्थिति का आंकलन कर रहे हैं। वह मतदान से कुछ दिन पहले चुप्पी तोड़कर तीन प्रमुख प्रत्याशियों में से किसी एक का समर्थन कर सकते हैं, जिसके साथ ही किसी भी प्रत्याशी का पासा पलट सकता है।

कापड़ीवास के शांत रहने से प्रत्याशियों में बेचैनी

रणधीर कापड़ीवास का टिकट की लिस्ट जारी होने के बाद से ही शांत रहना हलके के तीन प्रमुख प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा रहा है। उन्होंने अभी तक न तो पार्टी में बने रहकर प्रत्याशी का खुलकर साथ देने की बात कही और न ही पार्टी को अलविदा कहते हुए गत वर्ष की तरह इस बार भी भाजपा का खेल खराब करने का निर्णय लिया। सीट निकालने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कापड़ीवास को मनाने के काफी प्रयास कर चुका है, परंतु वह टस से मस होने को तैयार नहीं हैं। पार्टी प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह यादव को इस बात का पूरा भरोसा है कि कापड़ीवास पार्टी के सच्चे सिपाही के रूप में उनकी मदद के लिए आगे जरूर आएंगे।

कापड़ीवास से लक्ष्मण कर चुके मुलाकात

भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मण टिकट मिलने के बाद दो-तीन बार कापड़ीवास से मुलाकात कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार वीरवार को भी वह उनके कापड़ीवास स्थित निवास पर पहुंच गए, लेकिन बातचीत का परिणाम सामने आना शेष है। लक्ष्मण सिंह यादव कोसली से टिकट कटने के बाद अपने स्तर पर जुगाड़ बैठाकर रेवाड़ी की टिकट हासिल करने में कामयाब हो गए। उन्हें टिकट दिलाने में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का कोई रोल नहीं है। राव और संगठन से बराबर सामंजस्य बनाए रखने वाले लक्ष्मण सिंह यादव के कापड़ीवास के साथ भी राजनीतिक संबंध खराब नहीं रहे हैं।

चिरंजीव को नहीं मदद से कोई गुरेज

रेवाड़ी की राजनीति के मर्मज्ञ पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव बेटे चिरंजीव राव को दूसरी बार विधानसभा भेजने और रेवाड़ी के किले को सेंध से बचाने के लिए मजबूत रणनीति के साथ मैदान में हैं। चिरंजीव दूसरे प्रत्याशियों की तुलना में प्रचार अभियान में सभी को पीछे छोड़ चुके हैं। उनकी मजबूत स्थिति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। कापड़ीवास फैक्टर को लेकर वह पूरी तरह गंभीर हैं। पूर्व विधायक के भतीजे मुकेश कापड़ीवास से संपर्क साधकर चिरंजीव एक बार फिर से रेवाड़ी का किला फतह करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।

सतीश भी मांग चुके कापड़ीवास से साथ

दो चुनावों में दूसरी पॉजिशन पर रहने वाले सतीश यादव भाजपा से नाराज होने के बाद आप की झाडू थामकर मतदाताओं के बीच मजबूती के साथ उतर चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी रणधीर सिंह कापड़ीवास का साथ निभाने के लिए सतीश यादव ने चुनाव मैदान से कदम पीछे खींच लिए थे। उन्होंने चुनाव लड़ने की बजाय कापड़ीवास का साथ देने का फैसला लिया था। इस बार जब उनकी बारी आई है, तो वह कापड़ीवास से पिछले सहयोग की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार बने हुए हैं।