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Bahadurgarh: कुश्ती और सर्कल कबड्डी में विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले बहादुरगढ़ के जसवीर वत्स उर्फ जस्सू पहलवान विदेशी सरजमीं पर प्रतिभाएं तराश रहे हैं। कनाडा व न्यूजीलैंड जैसे देशों में पारंपरिक कुश्ती और कबड्डी को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रतिभाओं को निखारने तथा खेल के प्रति समर्पण को देखते हुए न्यूजीलैंड में उनको सम्मानित किया गया। आयोजकों ने सोने की चेन और गोल्ड कप भेंट कर जस्सू का मान बढ़ाया।

गांव सिद्दीपुर लोवा का रहने वाला है पहलवान जसवीर

जसवीर वत्स उर्फ जस्सू पंडित मूल रूप से बहादुरगढ़ के गांव सिद्दीपुर लोवा के रहने वाले हैं। बचपन से ही जस्सू को कुश्ती से प्रेम था। कम उम्र में कुश्ती लड़नी शुरू की। अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पदक जीते, लेकिन वर्ष 2009 में एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान चोटिल हो गए। चोट गंभीर थी, इस वजह से कुश्ती छोड़नी पड़ी। इसके बाद वर्ष 2010 में कबड्डी का अभ्यास शुरू किया। कड़ा परिश्रम किया तो प्रदर्शन में निखार आने लगा। देखते ही देखते कुछ ही वर्षों में जसवीर सर्कल कबड्डी का जाना-माना सितारा बन गए। ईरान, इटली, मलेशिया सहित कई देशों में अपने प्रदर्शन की छाप छोड़ी। यूरोप के क्लबों की तरफ से भी खेलते रहे।

एक ही दिन पिता व बेटे को खोया

जसवीर के जीवन में बुरा दौर भी आया। अगस्त 2017 में एक ही दिन जसवीर ने अपने बेटे और पिता को खो दिया। इससे वह टूट गया और कई दिन तक घर में ही रहे, लेकिन खिलाड़ी कभी हारता नहीं है। इसलिए कुछ समय बाद फिर से हिम्मत की और बुरे दौर से निकलकर परिश्रम शुरू किया। इसी दौरान इटली खेलने गए और वहां जबदस्त प्रदर्शन किया। विनम्र स्वभाव के जस्सू का सर्कल कबड्डी में काफी दबदबा रहा। इसके बाद वह कनाडा शिफ्ट हो गए। पिछले तीन साल से कनाडा में रहने वाले भारतीय तथा दूसरे मुल्क के बच्चों को कबड्डी, कुश्ती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। जस्सू से न केवल नई प्रतिभाएं बल्कि सर्कल कबड्डी के नामी सितारे पाल्हा जलालपुरिया, विनय, हरजोत सहित कई बड़े खिलाड़ी भी उनके मार्गदर्शन में प्रेक्टिस करते हैं।

यूरोप सहित अन्य देशों में बढ़ा जसवीर का कद

यूरोप सहित अन्य देशों में जसवीर पहलवान का कद बढ़ रहा है। फिलहाल उन्हें कबड्डी फेडरेशन ऑफ न्यूजीलैंड ने बुलाया था। करीब एक महीने तक जस्सू ने न्यूजीलैंड में खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को तराशा। इसे देखते हुए आजाद कबड्डी क्लब न्यूजीलैंड के पदाधिकारियों व खेल प्रेमियों द्वारा उन्हें गोल्ड कप व चेन पहनाकर सम्मानित किया गया। जस्सू का कहना है कि खिलाड़ी एक मैच में बेशक हार जाए, लेकिन जिंदगी में कभी नहीं हारता। कुश्ती, कबड्डी हमारी प्राचीन भारतीय परंपरा है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए वह कनाडा, न्यूजीलैंड आदि देशों में प्रयास कर रहे हैं। बच्चों, युवाओं को प्रशिक्षण देते हैं। मेरा युवाओं को यही संदेश है कि वे नशे, सामाजिक बुराइयों से दूर होकर खेलों में भाग लें, देशहित में काम करें।