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Haryana election : विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया के रेलवे की नौकरी से इस्तीफा देने के मामले में नया पेंच फंस गया है। शुक्रवार को दोनों पहलवान कांग्रेस में शामिल हुए थे। कांग्रेस पार्टी में शामिल होने से ठीक पहले दोनों ने रेलवे की नौकरी से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद रेलवे ने दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। रेलवे ने दोनों को नोटिस जारी कर कहा है कि जब तक दोनों का इस्तीफा मंजूर नहीं हो जाता है तब तक विनेश फोगाट हरियाणा चुनाव के लिए बतौर उम्मीदवार नामांकन नहीं कर सकती हैं।

भारतीय रेलवे ने पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया का इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया। उत्तर रेलवे ने दोनों पहलवानों को इस्तीफा देने के बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कांग्रेस पार्टी ने विनेश को हरियाणा की जुलाना सीट से टिकट दिया है, जबकि बजरंग को किसान कांग्रेस का वर्किंग चेयरमैन बनाया है।

उत्तर रेलवे ने बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट को नोटिस भेजकर पूछा है कि आखिर दोनों लोगों ने अपने पद से इस्तीफा क्यों दिया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि विनेश और बजरंग के इस्तीफे को लेकर पेच फंस सकता है। दोनों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया है। ऐसे में जब तक इनका इस्तीफा मंजूर नहीं होता है तब विनेश फोगाट का चुनाव मैदान में उतरना मुश्किल हो सकता है। चुनाव मैदान में उतरने के लिए इस्तीफा स्वीकार होना जरूरी है। रेलवे की नौकरियों में इस्तीफा देने के भी कई नियम कानून है जिसका पालन करना पड़ता है।

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क्या कहता है रेलवे का नियम?
अगर रेलवे के नियम की बात करें तो रेलवे के नियम के मुताबिक, यदि कोई कर्मचारी नौकरी में रहते हुए इस्तीफा देता है तो उसे 3 महीने का नोटिस देना पड़ता है। तीन महीने के नोटिस पीरियड का समय इसलिए रखा गया है कि अगर बीच में कभी उस कर्मचारी का मन सर्विस में आने का करता है तो वह अपने इस्तीफे को वापस ले सकता है, लेकिन अगर वो तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता है तो ऐसी स्थिति में वापसी की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

क्या फंस जाएगा पेच?
विनेश और बजरंग के तत्काल प्रभाव से इस्तीफे को लेकर रेलवे पेंच फंसाता हुआ दिख रहा है। अगर रेलवे विनेश का इस्तीफा नहीं स्वीकार करता तो विनेश आगामी हरियाणा चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएंगी। कानून कहता है कि अगर कोई शख्स किसी सरकारी पद पर बैठा है और अगर वो चुनाव लड़ना चाहता है तो सबसे पहले उसे इस्तीफा देकर विभाग से एनओसी लेनी पड़ती है। नामांकन के वक्त एनओसी को भी डॉक्यूमेंट में लगाना पड़ता है तभी रिटर्निंग ऑफिसर आवेदन को स्वीकार करेगा।

अदालत जाने के रास्ते खुले हैं
रेलवे की ओर से नोटिस जारी होने के बाद दोनों पहलवानों को उसका जवाब देना पड़ेगा। इसके बाद भी यह जरूरी नहीं है कि रेलवे उनके जवाब से संतुष्ट हो जाए और इस्तीफा स्वीकार कर ले। ऐसे में विनेश और बजरंग के सामने अदालत का रास्ता खुला है। इस्तीफा स्वीकारने में देरी होती है तो दोनों अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, लेकिन इन सब चीजों में भी समय लगेगा। इसलिए फिलहाल इस्तीफे को लेकर पेच फंसता हुआ नजर आ रहा है।

नामांकन के लिए 4 दिन का समय और बचा
हरियाणा में विधानसभा की 90 सीटें हैं और सभी में एक ही चरण में चुनाव होना है। हरियाणा में 5 अक्टूबर को वोटिंग है। चुनाव आयोग ने 5 सितंबर को अधिसूचना भी जारी कर दी है। इसके बाद से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नामांकन की प्रक्रिया 12 सितंबर तक चलेगी। 16 सितंबर तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में विनेश के पास नामांकन के लिए अब केवल 4 दिन का समय बचा हुआ है।

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