हरियाणा के गुरुग्राम में सीवर की सफाई के दौरान एक बार फिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी जानलेवा साबित हुई है। मंगलवार की रात सीवर की गहराई में फैली जहरीली गैस की चपेट में आने से दो सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य कर्मचारी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। यह घटना गुरुग्राम के फिरोजपुर झिरका नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत अंबेडकर चौक के पास घटित हुई।
रात 10 बजे सफाईकर्मी सफाई में जुटे थे
जानकारी के मुताबिक मंगलवार रात करीब 10 बजे फिरोजपुर झिरका नगरपालिका के सफाईकर्मी सीवर की सफाई के कार्य में जुटे थे। काम के दौरान जब पहला कर्मचारी सीवर के भीतर उतरा और काफी समय तक बाहर नहीं आया तो उसे देखने के लिए दूसरा कर्मचारी भी नीचे चला गया। जब दोनों ही वापस नहीं लौटे, तो वहां मौजूद अन्य साथियों की चिंता बढ़ गई।
हकीकत जानने के लिए जब तीसरे कर्मचारी को नीचे भेजा गया, तो अंदर जाते ही उसे खतरे का एहसास हुआ। उसने तुरंत चीखते हुए ऊपर मौजूद लोगों को आगाह किया, जिससे स्पष्ट हो गया कि सीवर के भीतर जहरीली गैस का प्रकोप है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। जेसीबी मशीन की सहायता से कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को सीवर से बाहर निकाला गया। दुर्भाग्यवश, तब तक दो कर्मचारियों के प्राण पखेरू उड़ चुके थे। तीसरे कर्मचारी को बेहोशी और गंभीर हालत में तुरंत मंडी खेड़ा स्थित अल आफिया सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां विशेषज्ञों की देखरेख में उसका उपचार जारी है।
ठेकेदार फरार
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक जांच में मौतों का कारण जहरीली गैस का शरीर में प्रवेश करना माना जा रहा है। फिलहाल मृतकों के परिजनों से संपर्क कर उनकी शिनाख्त की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। घटना के बाद से ही कार्य का जिम्मा लेने वाला ठेकेदार फरार है। पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और ठेकेदार की तलाश के साथ-साथ इस लापरवाही के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
सीवर में ये गैसें हैं खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार सीवर और बंद नालों में जमा कचरा सड़ने से गैसों का एक घातक मिश्रण तैयार होता है। इनमें सबसे खतरनाक हाइड्रोजन सल्फाइड है, जिसकी पहचान सड़े हुए अंडे जैसी गंध से होती है। यह गैस इतनी घातक है कि यह मनुष्य के सूंघने की शक्ति को ही खत्म कर देती है, जिससे व्यक्ति को खतरे का अंदाजा भी नहीं होता।
इसके अलावा सीवर में निम्नलिखित गैसें भी काल बनती हैं। ये गैसें मिलकर ऑक्सीजन को विस्थापित कर देती हैं, जिससे सीवर में उतरा व्यक्ति महज कुछ ही मिनटों में चेतना खो देता है।
• मीथेन : यह ऑक्सीजन के स्तर को कम कर दम घुटने का कारण बनती है।
• कार्बन मोनोऑक्साइड : यह खून में ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित कर देती है।
• अमोनिया : यह फेफड़ों और आंखों में गंभीर जलन पैदा करती है।
सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर उन कड़वे सवालों को खड़ा करती है कि आखिर क्यों सफाईकर्मियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (जैसे गैस मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर और सेंसर) के ऐसे मौत के कुओं में उतारा जाता है। बार-बार होने वाले इन हादसों के बावजूद ठेकेदारों और संबंधित विभागों की लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है, जिसका खामियाजा गरीब मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।