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उत्तर प्रदेश के कैराना निवासी दोनों युवक 20 फीट गहरे केमिकल टैंक की सफाई करने उतरे थे। टैंक में उतरते ही जहरीली गैस के कारण दोनों बेहोश हो गए।

हरियाणा के औद्योगिक शहर पानीपत में सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने दो जिंदगियों को लील लिया। गुरुवार को जलालपुर रोड स्थित एक टेक्सटाइल इकाई में सफाई के दौरान दम घुटने से दो सगे चचेरे भाइयों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों युवक बिना किसी सुरक्षा किट के  गहरे केमिकल टैंक के भीतर उतरे थे। टैंक में मौजूद जहरीले धुएं और ऑक्सीजन की कमी से दोनों की मौत हो गई। 

उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे 
मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव जंधेड़ी निवासी शिवम और नितिन के रूप में हुई है, 18 से 19 वर्ष की आयु के ये दोनों युवक परिवार का सहारा बनने के लिए रोजाना कैराना से पानीपत मजदूरी करने आते थे। गुरुवार को भी वे मयूर टेक्सटाइल फैक्ट्री में अपने काम पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह उनका आखिरी दिन होगा।

20 फीट गहरे मौत के कुएं में बिना सुरक्षा के उतारा 
दोपहर में फैक्ट्री प्रबंधन और ठेकेदार ने शिवम और नितिन को करीब 20 फीट गहरे केमिकल टैंक की सफाई का जिम्मा सौंपा। परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का गंभीर आरोप है कि इन युवकों को जहरीली गैसों से बचाने के लिए न तो मास्क दिए गए, न ही ऑक्सीजन सिलेंडर या कोई अन्य लाइफ-सेविंग किट। जैसे ही दोनों भाई टैंक की गहराई में उतरे, वहां जमा घातक गैसों के प्रभाव से उन्हें चक्कर आने लगे और वे वहीं बेहोश होकर गिर पड़े। 

'उठ जा मेरे भाई...' दोस्त की पुकार भी नहीं आई काम
टैंक के बाहर मौजूद साथियों ने जब कोई हलचल नहीं देखी, तो वे तुरंत नीचे उतरे और दोनों को बाहर निकाला। मौके पर मौजूद उनके दोस्तों और अन्य श्रमिकों ने उन्हें होश में लाने के लिए काफी संघर्ष किया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ दृश्यों में एक दोस्त बेसुध पड़े युवक की पीठ थपथपाते हुए और सीपीआर (CPR) देते हुए बिलख रहा है। वह बार-बार कह रहा था- उठ जा मेरे भाई, होश में आ जा, लेकिन शिवम और नितिन की सांसें थम चुकी थीं। आनन-फानन में उन्हें पानीपत के सामान्य अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिजनों ने हादसा नहीं, हत्या बताया 
अस्पताल पहुंचे पीड़ित परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने फैक्ट्री मालिक और ठेकेदार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यह महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि लापरवाही के कारण की गई हत्या है। उनका कहना है कि खतरनाक केमिकल टैंकों की सफाई के लिए विशेष मशीनों या पूर्ण सुरक्षा किट का होना अनिवार्य है, लेकिन लागत बचाने के चक्कर में मजदूरों की जान जोखिम में डाली गई। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए शव गृह भेज दिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है। 

औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे बड़े सवाल 
पानीपत में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। कुछ समय पहले कुराड़ रोड स्थित गोरजा इंटरनेशनल फैक्ट्री में भी ठीक इसी प्रकार दो मजदूरों की जान गई थी। बार-बार होने वाले ये हादसे पानीपत की औद्योगिक इकाइयों में श्रम कानूनों और सुरक्षा ऑडिट की पोल खोल रहे हैं। 

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