दोनों दिल्ली की प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। ड्यूटी के दौरान फैक्ट्री के फ्रीजर से निकालकर विषैला केमिकल पी लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हरियाणा के सोनीपत में मां की बीमारी के बाद उपजे मानसिक तनाव ने दो सगे भाइयों को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया। दिल्ली की एक निजी कंपनी में कार्यरत इन दोनों युवाओं ने संदिग्ध परिस्थितियों में जहरीला रसायन पी लिया, जिससे उनकी मौत हो गई। दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। 

बीमारी की छाया और मानसिक अवसाद 
मृतकों की पहचान सोनीपत के कुंडली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव प्याऊ मनियारी निवासी अभिषेक (26 वर्ष) और रितिक (25 वर्ष) के रूप में हुई है। घर के ये दोनों युवा काफी समय से गहरी मानसिक पीड़ा से गुजर रहे थे। उनके पिता दीपचंद की ओर से पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार उनकी पत्नी देवकी लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं। 

घर में मां की लाचारी और लगातार इलाज के बावजूद सुधार न होने की स्थिति ने दोनों भाइयों को भीतर से तोड़ दिया था। मां की सेवा और उनके स्वास्थ्य की चिंता ने दोनों के मन पर गहरा दबाव बना दिया था, जो इस आत्मघाती कदम का कारण बना।

दिल्ली की कंपनी में कार्यरत थे दोनों भाई 
अभिषेक और रितिक करीब 5 वर्षों से दिल्ली के नाथूपुर स्थित 'हर्ष न्यूट्रीकेयर प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी में बतौर ऑपरेटर सेवाएं दे रहे थे। परिवार की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारी का बोझ इन्हीं दोनों के कंधों पर था। सोमवार की सुबह भी दोनों रोज की तरह अपनी ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। दिनभर उन्होंने कंपनी में सामान्य रूप से कार्य किया, लेकिन किसी को इस बात का आभास नहीं था कि यह उनके जीवन का अंतिम दिन होगा। 

फ्रीजर से निकालकर पिया केमिकल 
शाम के वक्त फैक्ट्री परिसर में अचानक अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिली कि दोनों भाइयों की हालत बिगड़ गई है। फैक्ट्री प्रबंधन के दावों के मुताबिक काम के दौरान दोनों भाइयों ने गलती से पानी के धोखे में फ्रीजर में रखा कोई विषैला केमिकल पी लिया था। रसायन के शरीर में पहुंचते ही उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। 
आनन-फानन में कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें दिल्ली के पीतमपुरा स्थित सरोज अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें 'ब्रॉट डेड'  घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम के बाद हुई गमगीन विदाई 
दुखद घटना के बाद दिल्ली के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिए। जैसे ही एम्बुलेंस दो जवान बेटों के शव लेकर गांव प्याऊ मनियारी पहुंची, वहां चीख-पुकार मच गई। बीमार मां और लाचार पिता के विलाप ने ग्रामीणों का कलेजा चीर दिया। मंगलवार देर शाम गांव के श्मशान घाट में दोनों भाइयों को एक ही चिता पर मुखाग्नि दी गई।

जांच के घेरे में फैक्ट्री प्रबंधन का बयान 
एक ओर जहां फैक्ट्री प्रबंधन इसे महज एक 'गलती' या 'दुर्घटना' करार दे रहा है कि उन्होंने पानी समझकर केमिकल पी लिया, वहीं दूसरी ओर पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। दो अनुभवी कर्मचारी जो 5 साल से वहां काम कर रहे थे, वे पानी और केमिकल के बीच फर्क क्यों नहीं कर पाए? यह सवाल अब भी बना हुआ है। हालांकि, पिता की शिकायत में मुख्य कारण मानसिक तनाव और मां की बीमारी को बताया गया है।

पूरा गांव सदमे में
प्याऊ मनियारी गांव में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अभिषेक और रितिक बेहद मेहनती और मिलनसार थे। मां के प्रति उनका समर्पण ही उनकी पहचान थी, लेकिन उसी मां का दुख वे सह नहीं पाए। एक साथ दो चिरागों के बुझ जाने से दीपचंद का परिवार पूरी तरह टूट चुका है। ग्रामीण अब प्रशासन से इस मामले की पारदर्शी जांच की उम्मीद कर रहे हैं ताकि यह साफ हो सके कि सुरक्षा मानकों में चूक की वजह से यह हादसा हुआ या यह वास्तव में एक सामूहिक आत्महत्या थी। 

(हरियाणा के जिले, कस्बे और गांवों की खबरों के लिए हरिभूमि का "ई-पेपर" पढ़ें।  यहां क्लिक करें epaper haribhoomi या प्लेस्टोर से "हरिभूमि हिंदी न्यूज़" App डाउनलोड करें। )