सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल के करीब 11 साल बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने देशद्रोह के मामले में उन्हें जमानत दे दी है। रामपाल नवंबर 2014 से हिसार की सेंट्रल जेल-2 में सजा काट रहे हैं।
हिसार जेल के अधीक्षक उमेश कुमार ने जानकारी दी कि उच्च न्यायालय के आदेश संबंधित सत्र न्यायालय में पहुंचेंगे, जहां बेल बॉन्ड (जमानत की औपचारिकताएं) भरने के बाद रिहाई की प्रक्रिया शुरू होगी।
2014 में हुई थी रामपाल की गिरफ्तारी
रामपाल की गिरफ्तारी की कहानी साल 2014 के उन दिनों की है, जब कानून और उनके समर्थकों के बीच भारी तनाव पैदा हो गया था। दरअसल हाईकोर्ट ने एक पुराने मामले में रामपाल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन उनके न पहुंचने पर कोर्ट ने इसे अवमानना माना और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए।
जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने बरवाला स्थित सतलोक आश्रम पहुंची तो रामपाल के हजारों अनुयायियों ने पुलिस का रास्ता रोक लिया। इस हिंसक टकराव के दौरान आंसू गैस और बल प्रयोग करना पड़ा। इस पूरी घटना में 5 महिलाओं और एक बच्चे की जान चली गई थी। इसी हिंसा के बाद रामपाल पर देशद्रोह और हत्या जैसे गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे।
कुल 14 मामले दर्ज थे
रामपाल के वकीलों के अनुसार उन पर कुल 14 मामले दर्ज थे। इनमें से 11 मामलों में वे पहले ही दोषमुक्त (बरी) हो चुके हैं। अन्य दो मामलों में उनकी उम्रकैद की सजा को अदालत ने पहले ही स्थगित कर दिया था। अब आखिरी प्रमुख मामला देशद्रोह (केस नंबर 428) का था, जिसमें हाईकोर्ट ने अब उन्हें राहत दे दी है।
करौंथा कांड से शुरू हुआ था विवादों का सिलसिला
विवाद की जड़ें 2006 में रोहतक के करौंथा आश्रम में हुई हिंसा से जुड़ी हैं, जहां आर्य समाजियों और रामपाल समर्थकों के बीच झड़प में एक व्यक्ति की मौत हुई थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान 2014 में हिसार कोर्ट परिसर में उपद्रव हुआ था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए रामपाल को पेश होने का आदेश दिया था।
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