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हाईकोर्ट: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा संविधान सभा की बहस के दौरान सांसद, विधायक बनने के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता निर्धारित न करने पर व्यक्त किया गया पहला खेद 75 वर्ष बाद भी ठीक नहीं हुआ है। आज तक पहला खेद ठीक होने का इंतजार कर रहा है। आज भी हमारे देश में कैबिनेट मंत्री या सांसद या विधान सभा सदस्य बनने के लिए किसी शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है। क्या यह कानून की खामी है, या शुद्ध राजनीति या दोनों?
राव नरबीर के खिलाफ हुई थी सुनवाई
जस्टिस महावीर सिंह सिंधु ने नामांकन पत्रों में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी देने के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री राव नरबीर सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज करते हुए टिप्पणी की। याचिका के अनुसार 2017 में मंत्री राव नरबीर की शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मांगी थी। उन्हें सूचना नहीं मिली और प्रथम अपील दाखिल करनी पड़ी। एक दिसंबर 2018 को उन्हें राव नरबीर के शपथ पत्रों और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मिली। राव नरबीर ने झूठे शैक्षणिक पत्र दाखिल किए थे।
हिंदी साहित्य सम्मेलन को नहीं मान्यता
याचिकाकर्ता ने बताया कि राव नरबीर को लेकर जो जानकारी मिली, उसमें 1986 में हिंदी साहित्य में हिंदी विश्वविद्यालय, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से ग्रेजुएशन करने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में राजस्थान प्रदेश बनाम सरदार शहर एवं अन्य की सुनवाई करते हुए कहा था कि हिंदी साहित्य सम्मेलन को विश्वविद्यालय या बोर्ड की मान्यता नहीं है। अपना बचाव करते हुए राव नरबीर ने हाई कोर्ट को बताया कि उनके द्वारा प्राप्त की गई डिग्रियों को आज तक किसी भी सक्षम प्राधिकारी या निकाय द्वारा फर्जी, जाली या मनगढ़ंत नहीं घोषित किया और यदि संस्थान को यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है, तो भी उनकी ओर से कोई दोष नहीं होगा।
