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तोशाम/भिवानी: हवाओं ने मुझे हताश करने की बहुत कोशिश की, मैं वह परिंदा बना जिसने ऊंची उड़ान भरना सही समझा। इन लाइनों को सच करने का काम हिसार के राजकीय महाविद्यालय में भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं मूल रूप से तोशाम क्षेत्र के गांव मिरान निवासी प्रोफेसर मनोज ने किया है। 24 जून से 3 जुलाई तक चले अपने अभियान के बारे में बताते हुए प्रोफेसर मनोज ने कहा कि रूस देश के काकेकश पर्वत माला में स्थित रुस व यूरोप महाद्वीप के सबसे ऊंचे पर्वत एलब्रुश पर एक जुलाई को सुबह 8:30 बजे भारत का तिरंगा लहराया था।
यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी है एल्ब्रुस
प्रो. मनोज ने बताया कि यूरोप महाद्वीप के सबसे ऊंचे पर्वत को उत्तर की ओर से विजय किया तथा उसकी पूर्वी चोटी जिसकी ऊंचाई 5621 ( पश्चिमी सम्मिट 5642) मीटर है, उस पर भारत का तिरंगा लहराते हुए न केवल हरियाणा का बल्कि भारत का नाम भी रोशन किया। इस पर्वत की चढ़ाई उत्तर की तरफ से करना बड़ा ही मुश्किल काम है, जहां पर तापमान माइन्स 30 डिग्री व 60 किलोमीटर प्रति घंटा से तेज बफीर्ली हवाएं व ऑक्सीजन की मात्रा लगभग 50 प्रतिशत होती है। उन्होंने साहस का परिचय देते हुए एल्ब्रुस पर तिरंगा लहराने का काम किया।
आखिरी दिन की 1800 मीटर की चढ़ाई
प्रो. मनोज ने बताया कि अभियान के आखिरी दिन लगभग 1800 मीटर की चढ़ाई की व लगातार 9:30 घंटे बर्फ के ऊपर चलकर अपने अभियान को पूरा किया। उन्होंने अभियान को सफल बनाने एवं हौसला बढ़ाने के लिए माता-पिता, पत्नी, उच्चतर शिक्षा निदेशालय हरियाणा सरकार, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कृष्ण कुमार, पूर्व प्राचार्य डॉ. दीपमाला लोहान व सभी स्टाफ सदस्यों का आभार जताया। एल्ब्रुस पर्वत पर भारत की शान तिरंगा लहराकर प्रो. मनोज ने पूरे देश को गौरवांवित महसूस किया।
