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धर्मेंद्र हुड्डा और इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला की एक फोटो वायरल होने से राजनीति में खलबली मच गई है जिस पर चौटाला ने अपनी सफाई दी है।

हरियाणा की राजनीति में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान सुर्खियों में रहे धर्मेंद्र हुड्डा और इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला की वायरल फोटो ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। जींद में कोर कमेटी की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए अभय चौटाला ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी और हिसार सांसद जयप्रकाश (जेपी) पर भी तीखे प्रहार किए।

वायरल फोटो पर क्या बोले अभय?
धर्मेंद्र हुड्डा के साथ अपनी वायरल फोटो पर सफाई देते हुए अभय चौटाला ने कहा, "धर्मेंद्र हुड्डा पहले एनएसयूआई में था और दीपेंद्र हुड्डा के साथ उसकी कई तस्वीरें मौजूद हैं। जब कांग्रेस ने उसे पूरी तरह इस्तेमाल करके 'निचोड़' लिया, तब वह हमारी पार्टी में आया। उसने निष्ठा से काम किया, इसलिए हमने उसे सम्मानित किया।" बता दें कि धर्मेंद्र हुड्डा 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक में कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने के मामले में आरोपी करार दिया गया।

जेपी को दी कानूनी नोटिस की चेतावनी
सांसद जयप्रकाश (जेपी) द्वारा जाट आरक्षण के दौरान हुई हिंसा में इनेलो और बीजेपी पर षड्यंत्र का आरोप लगाने पर अभय चौटाला भड़क उठे। उन्होंने कहा, "हुड्डा साहब ने जेपी को पालकर छोड़ रखा है। जो उसे सिखाया जाता है, वही वह बोलता है। हमारी पार्टी का नाम लेकर लांछन लगाने के मामले में मैं उसे कोर्ट के जरिए कानूनी नोटिस भेजूंगा और माफी मांगने पर मजबूर करूँगा।"

राज्यसभा चुनाव और 16 मार्च का इंतज़ार
राज्यसभा चुनाव पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए इनेलो सुप्रीमो ने कहा कि पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी ने इस पर चर्चा की है। उन्होंने कहा, "हमने फैसला जनता पर छोड़ा है। 23 मार्च को शहीदी दिवस का कार्यक्रम है, हम जनभावनाओं का सम्मान करेंगे। राज्यसभा चुनाव को लेकर इनेलो अपना रुख 16 मार्च को स्पष्ट करेगी।" बीजेपी द्वारा सतीश नांदल को उम्मीदवार बनाए जाने पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो पीठ में छुरा घोंपता हो, उसका साथ देना आसान नहीं है।

सरकार पर हमला: किसान और बुजुर्ग हो रहे परेशान
अभय चौटाला ने प्रदेश सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने फोकल पॉइंट बंद कर किसानों को मुसीबत में डाल दिया है, जिससे मंडियों में भीड़ बढ़ेगी और किसानों को फसल औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।पीले कार्ड काटने और बुजुर्गों की पेंशन में कटौती कर सरकार उन्हें अपमानित कर रही है। लाइसेंसिंग नीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को अपने फैसले वापस लेने चाहिए और इस संबंध में वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।

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