मोरनी क्षेत्र में रविवार सुबह बड़ा हादसा टल गया, थापली नेचर कैंप से चंडीगढ़ जा रही छात्रों से भरी बस के ड्राइवर ने ब्रेक फेल होने पर बेकाबू बस को पहाड़ से टकराकर खाई में गिरने से बचा लिया।

हरियाणा के पंचकूला जिले के मोरनी क्षेत्र में रविवार सुबह एक भयानक सड़क दुर्घटना होते होते रह गई। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के माध्यम से नेचर कैंप में हिस्सा लेने आए छात्रों की एक बस के अचानक ब्रेक फेल हो गए। पहाड़ी रास्तों पर बेकाबू हुई इस बस में करीब 50 छात्र-छात्राएं सवार थे। चालक की तत्परता और जांबाजी की वजह से बस गहरी खाई में गिरने के बजाय पहाड़ से टकराकर रुक गई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, इस टक्कर में करीब 20 विद्यार्थी घायल हुए हैं। 

बस में सवार छात्र-छात्राओं के बीच चीख-पुकार मची 
हादसा उस वक्त हुआ जब महेंद्रगढ़ और पलवल जिलों से आए छात्रों का दल सुबह अपनी बस में सवार होकर थापली स्थित नेचर कैंप से चंडीगढ़ की ओर रवाना हुआ था। चश्मदीदों और छात्रों के अनुसार कैंप से कुछ ही दूरी तय करने के बाद बस के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया। जैसे ही बस चालक नरेंद्रपाल को इस खराबी का अहसास हुआ, बस में सवार छात्र-छात्राओं के बीच चीख-पुकार मच गई।
पहाड़ी ढलान और मोड़ों के बीच बस करीब 400 मीटर तक अनियंत्रित होकर दौड़ती रही। चालक ने हिम्मत नहीं हारी और कई खतरनाक मोड़ों पर बस को संतुलित रखा। जब सामने एक गहरा 'वी' (V) शेप का मोड़ आया तो चालक ने भांप लिया कि अब बस को रोकना अनिवार्य है, वरना वह सीधे 500 फीट गहरी खाई में जा गिरेगी। 

ड्राइवर ने खाई के बजाय पहाड़ को चुना 
बस की गति को नियंत्रित करने के लिए चालक नरेंद्रपाल ने एक बड़ा जोखिम उठाया। उन्होंने बस को जानबूझकर सड़क किनारे ऊंचे पहाड़ से टकरा दिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन पहाड़ के अवरोध ने बस की रफ्तार को शून्य कर दिया। छात्रों ने बताया कि यदि ड्राइवर उस मोड़ पर बस को पहाड़ की तरफ नहीं मोड़ता, तो बस खाई में समा जाती और किसी का भी बचना नामुमकिन होता। 

घायल छात्र पंचकूला के अस्पताल में भर्ती 
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग और अन्य वाहनों के चालक मदद के लिए दौड़े। घबराए हुए छात्रों को बस से बाहर निकाला गया। सूचना मिलने पर डायल 112 और एम्बुलेंस की टीम भी मौके पर पहुंची। घायल छात्रों को तुरंत दूसरी बस के जरिए पंचकूला के सामान्य अस्पताल (सेक्टर-6) पहुंचाया गया। 
घायलों में मुख्य रूप से पलवल की राधिका, चंचल, अंजलि, लक्ष्मी और पूजा, जबकि महेंद्रगढ़-नारनौल क्षेत्र से दीप्ति, दिव्य, दिव्या, मुस्कान और मोनिका शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार किसी भी छात्र को जानलेवा चोट नहीं आई है। अधिकांश विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि कुछ का अभी इलाज चल रहा है। 

नेचर कैंप और माउंटेन ट्रैकिंग का दल था सवार 
यह दल हरियाणा सरकार के खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित एक शैक्षणिक और साहसिक भ्रमण पर था। महेंद्रगढ़ और पलवल के करीब 80 युवाओं का यह समूह 27 मार्च को मोरनी के थापली स्थित नेचर पार्क पहुंचा था। यहां 81 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर युवाओं को माउंटेन ट्रैकिंग की ट्रेनिंग दी जा रही थी। इस दल का कैंप 1 अप्रैल तक चलना था। रविवार सुबह ये छात्र एक अन्य भ्रमण के लिए चंडीगढ़ जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया।

छात्रों और परिजनों में दहशत 
अस्पताल में मौजूद छात्र लक्ष्य ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि ब्रेक फेल होने के बाद ड्राइवर ने करीब चार मोड़ों तक बस को सुरक्षित निकाला। जब स्थिति हाथ से निकलने लगी तो ड्राइवर ने चिल्लाकर सबको संभलने को कहा और बस पहाड़ में दे मारी। हादसे के बाद से छात्र सहमे हुए हैं। सूचना मिलते ही कई छात्रों के परिजन भी पंचकूला अस्पताल पहुंच गए। पुलिस ने बस को कब्जे में लेकर जांच के आदेश दिए हैं ताकि ब्रेक फेल होने के सही कारणों का पता लगाया जा सके।

जिला प्रशासन ने घायल छात्रों की सूची तैयार की 
हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन और खेल विभाग के अधिकारी अस्पताल पहुंचे। जिला प्रशासन ने घायल छात्रों की सूची तैयार कर उनके गृह जिलों में सूचना भिजवा दी है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पहाड़ी क्षेत्रों में चलने वाली बसों की फिटनेस जांच समय-समय पर की जानी चाहिए, ताकि तकनीकी खराबी के कारण भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल, सभी छात्र खतरे से बाहर हैं और ड्राइवर नरेंद्रपाल की सूझबूझ की चारों तरफ प्रशंसा हो रही है, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर 50 मासूम जिंदगियों को नई जिंदगी दी।

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