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योगेंद्र शर्मा, चंडीगढ़: हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी की हैट्रिक के बाद अब 17 अक्टूबर को नायब सैनी मंत्रिमंडल का शपथ-ग्रहण समारोह आयोजित होने जा रहा है। पंचकूला हरियाणा की धरती पर आने वाले आम और खास चेहरों के लिए खास व्यवस्था की जा रही है। खास बात यह है कि प्रदेश के अंदर ठीक चुनाव से पहले ओबीसी कार्ड खेलने वाली भाजपा प्रदेश के अंदर मंत्रिमंडल गठन में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की झलक दिखाने जा रही है। प्रदेश के अंदर पिछड़ा, अगड़ा, दलित, ब्राह्मण, अहीर, जाट सभी समुदायों को साधने की कोशिश की जाएगी।

फूंक फूंक कर कदम रख रही भाजपा

भाजपा हाई कमान और प्रदेश भाजपा के थिंकटैंक फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं ताकि किसी को कोई शिकायत ना रहे। हरियाणा में भाजपा तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। दूसरी तरफ चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने वाले ज्यादातर विधायकों में अब मंत्री पद की दौड़ शुरू हो गई है। सभी अपने-अपने आकाओं के यहां गणेश परिक्रमा करने में जुटे हुए हैं। मंत्रिमंडल गठन में बताया जा रहा है कि जातिगत समीकरण साधने को लेकर होमवर्क कर लिया है। भाजपा नेतृत्व और प्रदेश के सियासी दिग्गज इस पर मंथन करने में जुटे हुए हैं। भाजपा अब ओबीसी, दलित, जाट समुदाय, वैश्य समुदाय के साथ ही यादव समुदाय, पंजाबी समुदाय को साधने का प्रयास करेगी।

2 उपमुख्यमंत्री बनाने की संभावना

भाजपा के उच्चपदस्थ भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के अंदर इस बार प्रयोग के तौर पर दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना ज्यादा हैं। इसके लिए दो पद सृजित कर जातिगत समीकरण बैठाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि उपमुख्यमंत्री को लेकर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष और प्रभारी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। उसके बावजूद इसकी संभावना ज्यादा है। सरकार गठन में जो भी मंत्री बनाए जाएंगे, उनमें भी जातिगत समीकरणों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। हरियाणा में अधिकतम 13 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस बार मुख्यमंत्री के अलावा अगर दो डिप्टी सीएम बनाए जाते हैं, तो 10 मंत्री बनाए जा सकेंगे, क्योंकि उपमुख्यमंत्री भी कैबिनेट रैंक का मंत्री होता है। अगर दो डिप्टी बने तो मंत्रियों की संख्या दस रखनी होगी।

पुराने मंत्रिमंडल के मात्र 2 मंत्री जीते

हरियाणा में इस बार पुराने मंत्रिमंडल से केवल दो ही मंत्री जीतकर आए हैं। बाकी सभी बुरी तरह पराजित हुए हैं। हरियाणा में पराजित हुए मंत्री अब दूसरे पदों को प्राप्त करने के जुगत में हैं, ताकि चंडीगढ़ में गाड़ी घोड़े, बंगले का इंतजाम रहे। वैसे, पूर्व सीएम मनोहरलाल के कुछ करीबी भी इस जुगाड़ में लगे हैं ताकि चौथे फ्लोर पर बैठा जा सके। इस क्रम में सभी प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री सैनी और दिल्ली दरबार पूर्व सीएम व केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल की गणेश परिक्रमा करने में लगे हुए हैं। इन्हें खुद की चिंता है, ताकि हरियाणा सचिवालय और मंत्रालय में जगह बनी रहे। हरियाणा में जीत कर आने वालों की बात करें तो महिपाल ढांडा और मूलचंद शर्मा ऐसे चेहरे हैं, जो पूर्व में मंत्री थे और इस बार चुनाव जीते हैं।

उपमुख्यमंत्री के लिए इन नामों की चर्चा

डिप्टी सीएम के लिए सबसे पहला नाम सबसे वरिष्ठ नेता अनिल विज का लिया जा रहा है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव का नाम भी प्रमुख रूप से लिया जा रहा है। उनके इलाके के लोग आरती राव को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा रहे हैं। प्रदेश के दक्षिणी हिस्से से चुनकर आई आरती राव और उनके परिवार पर भाजपा को दक्षिण जिताने में अच्छा खासा योगदान रहा है। राव समर्थक दावा कर रहे हैं कि यहां की जीत उनके कारण हुई है। उनके समर्थक तो यहां तक दावा करते हैं कि उन्होंने 15 सीटें राव परिवार के कारण जीती हैं। अगर भाजपा ने दलित कार्ड खेला, तो एक वक्त में इनेलो में रहे कृष्ण पंवार की लाटरी भी लग सकती है। दलित चेहरों में कृष्ण बेदी भी शामिल हैं, क्योंकि वे वाल्मीकि समुदाय से हैं।

मंत्री की दौड़ में ये शामिल

कपूर सिंह बवानी खेड़ा मंत्री पद की दौड़ में हैं। राज्यसभा सांसद पंवार इसराना सीट (सुरक्षित) से चुनाव जीतकर आए हैं। बेदी नरवाना रिजर्व से चुनाव जीत कर आए हैं। इन चेहरों में से किसी को भी मंत्रिमंडल में लिया जा सकता है। जाट नेताओं में महिपाल ढांडा तीसरी बार विधायक बने हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल की पौत्री श्रुति चौधरी के अलावा रोड समुदाय से आने वाले हरविंदर कल्याण भी मंत्री पद की दौड़ में हैं। पिछड़े वर्ग से रणबीर गंगवा (पूर्व डिप्टी स्पीकर) भी इस दौड़ में हैं। ब्राह्मण नेताओं में डॉ. अरविंद शर्मा और मूलचंद शर्मा का नाम प्रमुख रूप से लिया जा रहा है। पूर्व मंत्री राव नरवीर सिंह के अलावा घनश्याम सर्राफ, निखिल मदन और सावित्री जिंदल को भी मंत्री बनाए जाने की चर्चा है।