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सुभाष शर्मा, Ambala: तीन पट्टियों वाले गांव से मशहूर मुलाना का अपना ही एक अलग इतिहास रहा है। मुलाना गांव मारकंडे नदी के किनारे पर बसा हुआ है, जिसका एक हिस्सा एनएच 344 के साथ सटा हुआ है। इस गांव में करीब 8500 वोट और 11000 की आबादी है। जिले में गांव की अलग ही पहचान है। आधुनिकता के युग में देश विदेश में इस गांव को एमएम यूनिवर्सिटी के कारण भी पहचान मिली है। यह गांव प्रदेश की राजनीति का भी हिस्सा है, जहां से चुने गए कई जनप्रतिनिधि प्रदेश के मंत्रीमंडल में भी स्थान पा चुके हैं। यहां तक कि देश की संसद में भी स्थान प्राप्त करने में कामयाब हुए है। यहां से बने जनप्रतिनिधि अपनी पहचान के लिए गांव के नाम का इस्तेमाल करते है।
कई प्राचीन हवेलियों की विरासत को संभाले हुए गांव मुलाना
गांव मुलाना के लोगों ने प्रदेश के प्रसिद्ध रागनी कलाकार पंडित लख्मी चंद को भी सुना है। यह काफी प्राचीन गांव है जो कभी मुस्लिम बाहुल्य भी रहा है। कई प्रचीन हवेलियों की विरासत को संभाले हुए है। शेरशाह सूरी द्वारा राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए बनाए गए कई कुंओं को भी गांव के लोगों ने देखा, जो अब विलुप्त हो चुके है। यहां रहने वाली ज्यादातर आबादी हिंदू है। मुस्लिम वर्ग के कुछ लोग यहां निवास कर रहे है। गांव में हिंदुओं के तीन नगर खेडा, तीन शमशान, मुस्लिम वर्ग के लिए एक कब्रिस्तान है। 1426 में बना माता बाला सुंदरी के नाम से प्राचीन मंदिर है। यहां साल में दो बार मेले का आयोजन होता है जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होते है। दो राम लीलाओं का यहां मंचन होता है। गांव की तीन पट्टियां मुलाना पट्टी, भगेरडू पट्टी, चनारथल पट्टी है।
अब तक ये रहे मुलाना के सरपंच
गांव मुलाना में प्रवीन कुमार, सरपंच नरेश चौहान, 1952 में सरपंच रहे लाला छ्ज्जू राम, बबीता चौहान, दो बार सरपंच पद पर आसीन रहे चंद्रशेखर चौहान, तीन बार सरपंच चुने गए सुनील सहगल, दो बार के सरपंच रहे डॉ. योगेंद्र पाल, लाला जय दयाल, डॉ. सोमप्रकाश, शिवदयाल सरपंच पद पर रहे है। दो दशकों से आधुनिकता को यहां के लोगों ने देखा। जब गांव में युवाओं की पंचायत का गठन हुआ। गांव की सुंदरता को चार चांद लगने शुरू हुए। गांव का सौंदर्यकरण हुआ। जगमग रोशनी का जाल बिछा। स्वच्छता का माहौल बना। गांव के प्रवेश द्वार पर स्वागत द्वार लगे।
1426 में हुआ था मंदिर का निर्माण
बीते कुछ वर्ष पहले माता बाला सुंदरी मंदिर का रिकॉर्ड राज्यस्थान के भाटो के यहां से प्राप्त हुआ था। भाटो के अनुसार वह मुलाना में क्षत्रिय समाज के यहां साल में एक बार जाते है। भाटो ने मंदिर कमेटी को बताया कि मुलाना कस्बे को 1422 में बसाया गया था। मां बाला सुंदरी मंदिर का निर्माण सन 1426 में कराया गया। 1425 में गांव के नंबरदार सोराज सिंह के सपने में माता ने दर्शन देकर मंदिर का निर्माण कराने व ताल की खुदाई कराने की बात कही थी। ऐसी लिखित बातें भाटो के दस्तावेजों में दर्ज है। गांव को हरियाणा सरकार की और से निर्मल गांव, आदर्श गांव और अब हाल में मुलाना गांव को महाग्राम योजना में शामिल करना स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी सौगात रही। इसके तहत गांव को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
महाग्राम योजना में शामिल होने से मिलेंगी सुविधाएं
महाग्राम योजना के अन्तर्गत मुलाना गांव में 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तक पेयजल आपूर्ति होगी, जो पहले 75 लीटर प्रति व्यक्ति था। मुलाना में सीवरेज सुविधा और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के कार्य भी होंगे। जिससे मुलाना गांव का सौंदर्यकरण भी होगा। नालियों के ओवरफ्लो से भी लोगों को निजात मिलेगी। योजना के तहत गांवों की गलियों को कूड़ा-कर्कट व गंदगी-मुक्त करने की भी तैयारी है। यहां खेल स्टेडियम बनाए जाने, अमृत सरोवर योजना के तहत सरोवर के सौन्दर्यकरण का कार्य भी किया जा रहा है। गांव में पुलिस थाना, सरकारी स्कूल, सरकारी अस्पताल, पशु अस्पताल, तहसील, पावर हाउस, दुरभाष केंद्र, अनाज गोदाम, अनाज मंडी, मंडी कार्यालय, कई बैंक स्थापित है।
