A PHP Error was encountered
Severity: Warning
Message: Undefined variable $summary
Filename: widgets/story.php
Line Number: 3
Backtrace:
File: /content/websites/front-hbm/application/views/themes/mobile/widgets/story.php
Line: 3
Function: _error_handler
File: /content/websites/front-hbm/application/views/themes/amp/story.php
Line: 39
Function: view
File: /content/websites/front-hbm/application/libraries/Sukant.php
Line: 507
Function: view
File: /content/websites/front-hbm/application/libraries/Sukant.php
Line: 341
Function: loadAmpTheme
File: /content/websites/front-hbm/application/controllers/Content.php
Line: 303
Function: contentStorypageAmp
File: /content/websites/front-hbm/index.php
Line: 319
Function: require_once
JE Pension Benefit Case: न्याय में देरी को अन्याय माना जाता है। तमाम अदालतें भी मामले की सुनवाई जल्द पूरी करना चाहती हैं, लेकिन मामले को लटकाने के लिए विपक्षी पार्टी जानबूझकर अड़चनें डालती हैं। इसके चलते कई बार फैसला आने तक याचिकाकर्ता की मृत्यु तक हो जाती है। ऐसा ही मामला हरियाणा से सामने आया है। यहां एक जेई ने पेंशन की मांग को लेकर 21 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन फैसला उनकी मौत के चार साल बाद सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा बिजली वितरण निगम में जूनियर इंजीनियर चंद्र प्रकाश 1999 में रिटायर हो गए थे। इसके बाद किसी आरोप के कारण उनके पेंशन लाभ में कटौती की गई थी। इसे लेकर उन्होने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में केस दर्ज कराया था। इसके बाद 21 साल तक कानून की लड़ाई लड़ते-लड़ते दम तोड़ दिया। अब जाकर उनकी मौत के चार साल बाद कोर्ट से उन्हें इंसाफ मिला है।
कोर्ट ने उनका पेंशन लाभ जारी करने के साथ दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड पर 8 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस जुर्माने में चार लाख उनके आश्रितों को और बाकी हाई कोर्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी में जमा करने होंगे।
2008 में कोर्ट ने दिया था ये आदेश
बता दें कि चंद्र प्रकाश ने हाईकोर्ट को अपने याचिका में बताया था कि वह दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में जूनियर इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे और वह 1999 में रिटायर हो गए। इस दौरान उन पर कुछ वित्तीय आरोप लगाते हुए उनके पेंशन लाभों में से 2,13,611 रुपये की कटौती कर ली गई। साथ ही, उनके दो इंक्रीमेंट भी रोक दिए गए थे।
इस मामले की शिकायत करने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ। हाईकोर्ट से सहायता लेने पर 2008 में कोर्ट ने निगम के दोनों आदेश रद्द कर दिए और निगम को छूट दे दी कि कानून के अनुसार याची से नुकसान की वसूली की जा सकती है।
याची के मौत के बाद वारिस ने लड़ी लड़ाई
साथ ही कोर्ट ने निगम को याची की पेंशन से काटी गई राशि वापस करने के लिए भी कहा था। इस आदेश के बाद निगम ने चंद्र प्रकाश को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद निगम बार-बार मामले को टालता रहा। इसलिए याची को कई बार हाईकोर्ट से मदद लेनी पड़ी।
Also Read: हरियाणा पंजाब हाई कोर्ट, सिरसा एसपी को किया तलब, केस की सुनवाई में पुलिस की गैर मौजूदगी पर उठाया कदम
साल 2020 में याची ने अपनी छठी याचिका दर्ज की थी और उसके कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद उनके कानूनी वारिस ने यह लड़ाई लड़ी। कोर्ट ने अब याची की पेंशन से की गई कटौती की राशि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ तीन महीने में उनके वारिसों को सौंपने का आदेश सुनाया है।
