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Rewari: गुरुग्राम लोकसभा सीट पर कांग्रेस की टिकट डिक्लेयर होने के बाद राजनीतिक शतरंज की बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस ने सर्वाधिक अहीर मतों वाले इस क्षेत्र में गैर अहीर के रूप में राज बब्बर को मैदान में उतारकर इस बार अपनी चाल बदल दी है। कांग्रेस का प्रयास अहीर बाहुल्य हलकों में अपने परंपरागत वोट के साथ गैर अहीर वोटों के एकीकरण से भाजपा को मात देने का है। गत लोकसभा चुनावों में राव इंद्रजीत सिंह को सीधी टक्कर दे चुके कैप्टन अजय सिंह यादव को मैदान से हटाना कांग्रेस के लिए अहीर बाहुल्य हलकों में घाटे का सौदा साबित हो सकता है।

1971 से पहले मुस्लिम व गैर मुस्लिम प्रत्याशियों की सफलता बराबर

वर्ष 1971 से पहले गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र मुस्लिम और गैर मुस्लिम प्रत्याशियों की सफलता लगभग बराबर रह चुकी थी। वर्ष 1952 के पहले आम चुनावों में इस सीट पर ठाकुर दास भार्गव कांग्रेस की टिकट पर सांसद बने थे। वर्ष 1957 में कांग्रेस की टिकट पर मुस्लिम प्रत्याशी के तौर पर अबुल कलाम आजाद ने जीत दर्ज की थी। एक साल बाद हुए उपचुनाव में निर्दलीय प्रकाशवीर शास्त्री भी सांसद बन गए थे। वर्ष 1962 में कांग्रेस की टिकट पर गजराज सिंह यादव चुनाव जीते, तो वर्ष 1967 में निर्दलीय अब्दुल गनी डार ने भी जीत दर्ज की थी। इस सीट पर नए परिसीमन से पहले वर्ष 1971 में हुए आखिरी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर ही तैय्यब हुसैन को संसद पहुंचने का मौका मिला था। परिस्थितियां यह रही कि कांग्रेस के विरोध की हवा चलने पर निर्दलीय तक संसद पहुंचने में कामयाब हो गए थे।

परिसीमन में गुरुग्राम दूसरी बार बना लोकसभा क्षेत्र

वर्ष 2008 में हुए परिसीमन में गुरुग्राम दूसरी बार लोकसभा क्षेत्र बना। इसके बाद वर्ष 2009 के पहले ही चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह कांग्रेस की टिकट पर मैदान में उतरे थे। वह बसपा के जाकिर हुसैन को हराकर संसद पहुंचे। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर शुरू हो चुकी थी। राव भाजपा में शामिल हो चुके थे। इन चुनावों में भी उन्हें मुस्लिम प्रत्याशी जाकिर हुसैन ने ही चुनौती दी थी। इन दोनों चुनावों में समानता यह रही कि राव के सामने मुस्लिम प्रत्याशी होने के कारण नूंह जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा था। ओवरऑल जीत में अहीर मतों का बड़ा योगदान रहा था। पिछले लोकसभा चुनावों में कैप्टन अजय सिंह यादव को मुस्लिम मत बड़ी संख्या में मिले थे, जिस कारण वह हार के बावजूद 5 लाख मतों के पास पहुंच गए थे।

पंजाबी मतों पर राज बब्बर की खास नजर

राज बब्बर की पहचान पंजाबी नेता के रूप में होती है। गुरुग्राम में पंजाबी मतदाताओं की संख्या लगभग 2 लाख मानी जा रही है। राज बब्बर सबसे पहले पंजाबी मतों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं। वह निर्दलीय चुनाव लड़ चुके पंजाबी नेता मोहित ग्रोवर से संपर्क साधकर इस मुहिम को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। शहरी क्षेत्र में पंजाबी मतदाताओं का रुझान पूर्व में राव की ओर रहा है। पूर्व सीएम मनोहरलाल राव के पक्ष में पंजाबी मतदाताओं को साधने के लिए भाजपा में तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।

अहीरवाल में समीकरण राव के पक्ष में

अगर कांग्रेस गैर अहीर मतों के एकीकरण का प्रयास करती है तो अहीर मतों का राव के पक्ष में एकीकृत होना स्वाभाविक होगा। पूर्व में अहीर और गैर अहीर के खेल में बाजी राव ही मारते रहे हैं। अहीर मतों का बिखराव करने में कैप्टन अजय सिंह यादव को काफी हद तक सफलता मिली थी। कैप्टन को टिकट नहीं मिलने से समर्थकों की नाराजगी भी राज बब्बर के लिए अहीर बाहुल्य इलाकों में नुकसान पहुंचा सकती है। फिलहाल इस सीट पर मुकाबला एकतरफा होने से ज्यादा रोचक होने की संभावना बनती नजर आ रही हैं।