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राहुल दादू ने जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर फेसबुक लाइव के माध्यम से एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि इसके पीछे किसी ओर नहीं बल्कि भाजपा नेता का हाथ था।

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा और उसमें झुलसे हरियाणा के जख्म एक बार फिर ताजा हो गए हैं। आंदोलन के पीड़ित रहे राहुल दादू ने फेसबुक लाइव के माध्यम से एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने 2016 के दौरान हुए दंगों को एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश बताते हुए सीधे तौर पर एक अज्ञात भाजपा नेता और यशपाल मलिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

राहुल दादू ने किया दावा "यह आंदोलन नहीं, सुनियोजित साजिश थी"
राहुल दादू ने दावा किया कि आरक्षण की आड़ में हरियाणा को जानबूझकर जलवाया गया था। उन्होंने कहा, "यह केवल आरक्षण की मांग नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक एजेंडे के तहत 50 मांगें बना दी गई थीं। हरियाणा को जलवाकर दो बार सरकार बनाने का खेल खेला गया।" दादू के अनुसार, इस पूरी घटना के पीछे एक प्रभावशाली भाजपा नेता का हाथ था, जिसने यशपाल मलिक को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया।

कैप्टन अभिमन्यु की कोठी के जलने पर उठाए सवाल
आंदोलन के दौरान तत्कालीन वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने के मामले पर राहुल दादू ने कई तीखे सवाल खड़े किए गए है।उन्होंने पूछा कि जब राज्य में इतना बड़ा तनाव था, तो वित्तमंत्री की कोठी पर सुरक्षा क्यों नहीं थी? दादू ने तर्क दिया कि यदि भूपेंद्र हुड्डा ने कोठी जलवाई होती, तो कैप्टन अभिमन्यु ने अपनी FIR में उनका नाम दर्ज क्यों नहीं करवाया? दादू के अनुसार, युवाओं की लड़ाई सरकार की नीतियों से थी, लेकिन उन्हें इस बड़े षड्यंत्र का शिकार बनाया गया।

खापों और नेताओं पर भी बरसे राहुल
राहुल दादू ने आरक्षण आंदोलन के दौरान खापों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खापें समझौता करवाने का दावा करती हैं, लेकिन असलियत यह है कि युवा अपनी कानूनी लड़ाई लड़कर कोर्ट से बरी हुए हैं।
दादू ने दावा किया कि उनके ऊपर लगे 8 मुकदमों में से 2 मामले अशोक बल्हारा के इशारे पर दर्ज कराए गए थे, जबकि वह केवल बातचीत करने गए थे। उन्होंने यशपाल मलिक को भाजपा का 'प्यादा' बताते हुए कहा कि उसने हमेशा लोगों को धरने के नाम पर भ्रमित किया है।

"निर्दोष युवाओं को बनाया गया निशाना"
राहुल दादू ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि इस आंदोलन ने उनके जैसे कई युवाओं के जीवन के 10 साल बर्बाद कर दिए। उनके अनुसार, पुलिस ने असल अपराधियों को छोड़ने के बजाय निर्दोषों को झूठे मुकदमों में फंसाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई संघ की विचारधारा और सत्ताधारी सरकार के दमनकारी रवैये के खिलाफ है।

जांच के खुले नए आयाम 
राहुल दादू के इस खुलासे के बाद एक बार फिर हरियाणा की राजनीति में हलचल मच गई है। जिस तरह से उन्होंने दंगे को लेकर सत्ता के गलियारों में रची गई साजिश की ओर इशारा किया है, वह जांच के नए आयाम खोल सकता है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन आरोपों पर कोई संज्ञान लेता है या यह बयान केवल राजनीतिक चर्चा बनकर रह जाएगा।

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