मनी लॉन्ड्रिंग केस में सख्ती दिखाते हुए रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित सभी 9 आरोपियों को कोर्ट ने आदेश जारी किया है। बता दें कि जांच एजेंसी को शक है कि 'ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज' एक फर्जी कंपनी थी, जिसका इस्तेमाल केवल इस सौदे के लिए किया गया।

Haryana money laundering case: हरियाणा के शिकोहपुर (गुरुग्राम) जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित सभी 9 आरोपियों को समन जारी किया है। कोर्ट ने सभी को 16 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।

हुड्डा सरकार के समय हुआ स्कैम 
यह विवाद फरवरी 2008 का है, जब रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी' ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन मात्र 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। उस समय प्रदेश में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी।

वाड्रा की कंपनी ने जमीन को 58 करोड़ में बेचा 
जमीन खरीदने के तुरंत बाद हुड्डा सरकार ने इस कृषि भूमि को कमर्शियल कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस दे दिया। लाइसेंस मिलते ही जमीन की कीमत आसमान छूने लगी। इसके बाद वाड्रा की कंपनी ने इस जमीन को DLF को 58 करोड़ रुपए में बेच दिया। यानी मात्र 4 महीने के भीतर कंपनी को करीब 50 करोड़ रुपए (700% से ज्यादा) का मुनाफा हुआ।

नियमों को ताक पर रखकर DLF को पहुंचाया फायदा 
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह जताया है। ED की जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • फर्जी कंपनी का अंदेशा: जांच एजेंसी को शक है कि 'ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज' एक फर्जी कंपनी थी, जिसका इस्तेमाल केवल इस सौदे के लिए किया गया।
  • चेक का रहस्य: जमीन खरीद के लिए जो चेक दिया गया था, वह कभी बैंक में जमा ही नहीं किया गया।
  • DLF को लाभ: आरोप है कि हुड्डा सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर वाड्रा की कंपनी के जरिए DLF को फायदा पहुंचाया। बदले में DLF को वजीराबाद में 350 एकड़ जमीन आवंटित की गई, जिससे कथित तौर पर कंपनी को 5,000 करोड़ का फायदा हुआ।

IAS अशोक खेमका ने रद्द किया था म्यूटेशन
साल 2012 में तत्कालीन भूमि रजिस्ट्रेशन निदेशक और चर्चित IAS अधिकारी अशोक खेमका ने इस सौदे में भारी अनियमितताएं पाते हुए जमीन के म्यूटेशन (स्वामित्व हस्तांतरण) को रद्द कर दिया था। इसके बाद खेमका का तबादला कर दिया गया, जिससे यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था। साल 2018 में हरियाणा पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी, जिसके आधार पर अब ED अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है।

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