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Fatehabad: पिछले 6 दिनों में फतेहाबाद में चार बार बारिश हुई और 160 एमएम पानी बरसा। हालात ऐसे हो गए कि हाइवे के दूसरी तरफ रतिया-भूना मार्ग के खेतों में कई-कई फुट पानी जमा हो गया। इस जमीन पर धान की फसल की रोपाई की हुई है। अब यहां इतना पानी है कि धान की फसल दिखाई नहीं देती। पिछले साल इन्हीं दिनों में यहां यही हालात थे। फर्क इतना था कि उस समय पानी शिवालिक की पहाड़ियों से यहां घग्घर से होते हुए बाढ़ के रूप में आया तो इस साल लोकल बारिश ने सब कुछ डूबो कर रख दिया। जलभराव से खफा किसान सोमवार को लघु सचिवालय पहुंचे और उपायुक्त से पानी निकासी की मांग की।
बरसात से बने बाढ़ जैसे हालात
जुलाई माह में हुई बरसात से फतेहाबाद में एक साल बाद फिर बाढ़ जैसे हालात बनकर खड़े हो गए हैं। इस बार यह बाढ़ घग्घर नदी से नहीं आई बल्कि पिछले सप्ताहभर में हुई मानसून की तेज बारिश के चलते यह हालात पैदा हुए हैं। किसान इसके लिए प्रशासन को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं। हालात ये हैं कि फतेहाबाद के बाहर नेशनल हाइवे बाइपास के साथ-साथ काफी बड़े क्षेत्र में बरसाती पानी जमा हो चुका है। माजरा रोड से लेकर रतिया रोड तक चारों तरफ बरसाती पानी ही पानी नजर आता है, जो पिछले साल आई बाढ़ की त्रासदी याद करवा रहा है। काफी एकड़ जमीन में लगी धान की फसल पानी में डूब चुकी है तो वहीं कई ढाणियां और ट्यूबवेल भी पानी की चपेट में हैं।
चिल्ली झील तक पहुंच गया पानी
किसानों ने बताया कि पाइपलाइन लीकेज होने के चलते पानी आगे जाने की बजाए खेतों में फैल गया और यहां से होते हुए वापस चिल्ली झील तक पहुंच गया है। किसानों ने प्रशासन को मौके पर जाकर जायजा लेने की मांग उठाई और जलभराव से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की। किसानों की शिकायतें सुनने पहुंचे एडीसी राहुल मोदी ने किसानों को आश्वासन दिया, जिसके बाद किसान लौट गए। किसानों ने चेतावनी दी कि दो-तीन दिन में यदि मांगों पर गौर नहीं किया और पानी नहीं निकला तो बड़ा कदम उठाया जाएगा। सोमवार को रतिया रोड पर हाइवे की दोनों साइड पानी से भर गई। नागपुर रोड पर गांव खान मोहम्मद के पीछे तक बरसाती पानी पहुंच गया है। रतिया रोड पर दोनों ओर बने मैरिज पैलेसों के तीनों तरफ बरसाती पानी फैल गया है। इससे पानी के पैलेसों में भी घुसने का खतरा पैदा हो गया।
पिछले साल बाढ़ ने मचाई थी तबाही
बता दें कि पिछले साल 10 जुलाई के आसपास जिले में घग्घर का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था और 15 जुलाई के आसपास पंजाब क्षेत्र में घग्घर टूटने व जाखल में ओवरफ्लो होने पर रतिया व जाखल क्षेत्र के गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। अगले दो दिनों बाद रतिया, जाखल क्षेत्रों में कई जगहों से घग्घर और कई जगहों से रंगोई नाला टूटने से फतेहाबाद शहर तक बाढ़ पहुंच गई थी और डेढ़ महीने तक बाढ़ का पानी यहां इसी क्षेत्र में खड़ा रहा था। उस समय फतेहाबाद की एक लाख एकड़ कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में आ गई थी जबकि सैकड़ों ढाणियों व गांव की आबादी में पानी घुस गया था।
