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Jind: चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें हरियाणा के राज्यपाल व कुलाधिपति बंडारू दत्तात्रेय ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के 2021 से 2023 तक के 744 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें 509 छात्राएं शामिल रही। विभिन्न विषयों के 21 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए, जिनमें 18 छात्राएं शामिल रही। सभी को राज्यपाल ने डिग्री व मेडल प्रदान कर आशीर्वाद दिया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
भारत का युवा ऊर्जावान
हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि भारत का युवा बहुत ही ऊर्जावान है। पूरे विश्व की निगाहें भारत की युवा पीढ़ी पर लगी हैं। यहां का युवा दुनिया के अन्य देशों की जरूरत बन रहा है। युवाओं में नवाचार के साथ-साथ हर पल कुछ नया सीखने की भावना का होना जरूरी है। युवा महज अपने तक रोजगार पाने की न सोचकर अन्य को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करें। इसके साथ ही अपने अंदर समाज और राष्ट्र सेवा की भावना रखकर देश को दुनिया का सुपर पावर देश बनाएं। उन्होंने समाज से महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने व मान सम्मान करने का आह्वान किया। महिलाओं के साथ अत्याचार करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। सभ्य समाज के निर्माण के लिए महिलाओं का आदर करना बहुत जरूरी है।
पूनम सूरी को पीएचडी की मानद उपाधि से किया सम्मानित
शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डीएवी शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष पूनम सूरी को समारोह के दौरान पीएचडी की मानद उपाधि से नवाजा गया। राज्यपाल ने डिग्री लेने व स्वर्ण पदक हासिल करने वालों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों को अपनी ओर से शुभकामनाएं दी और कहा कि वे जहां भी जाएं, अपने अभिभावकों, समाज व राष्ट्र के साथ-साथ अपने विश्वविद्यालय को कभी न भूलें, जहां से उन्होंने शिक्षा-दीक्षा ली है। विद्यार्थियों में हमेशा नई तकनीक सीखकर आगे बढ़ने, नवाचार और नया शोध करने की भावना का होना जरूरी है। निपुणता जितनी बढ़ेगी, उतने ही रोजगार के अवसर अधिक मिलेंगे। युवाओं में समाज के प्रति समर्पण की भावना होनी चाहिए।
जिसे मंजिल का जूनून है वे कभी मशविरा नहीं लेते: न्यायधीश डॉ. सूर्यकांत
दीक्षांत समारोह के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि गुणवत्ता युक्त शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण की कुंजी होती है। शिक्षा नैतिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। इसी से ही आने वाली पीढ़ी सभ्य और समाज के प्रति समर्पित बनेगी। देश की उन्नति के लिए पूर्ण संसाधनों का होना जरूरी है, जिनमें इंसान के अंदर दक्षता, निपुणता और कुशलता मुख्य रूप से शामिल है। न्यायाधीश ने कहा कि देश को समृद्धशाली बनाने के लिए निरंतर प्रगति जरूरी है। न्यायाधीश डॉ. सूर्यकांत ने अपने विद्यार्थी जीवन की यादें ताजा कर सांझा की। भले ही उस समय संसाधनों का अभाव था, लेकिन उनमें सीखने की प्रबल भावना थी। ग्रामीण परिवेश से शिक्षा लेकर वे जिस मुकाम तक पहुंचे हैं, उसमें उनके शिक्षकों का अहम योगदान है, जिनकी दुआएं अब भी उनके साथ रहती हैं।
