नए प्रस्ताव के तहत मनीमाजरा में स्टिल्ट पार्किंग भी अनिवार्य होगी। सबसे बड़ा बदलाव आईटी पार्क में दिखेगा, जहां पर्यावरण कारणों से रुके फ्लैट्स प्रोजेक्ट की जगह अब करीब 400 रिहायशी प्लॉट विकसित किए जाएंगे।

सिटी ब्यूटीफुल के नाम से मशहूर चंडीगढ़ के स्वरूप में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के मास्टर प्लान में व्यापक संशोधन की तैयारी कर ली है। इस नई योजना के तहत जहां मनीमाजरा में इमारतों की ऊंचाई बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है, वहीं सेक्टर-43 जैसे प्रमुख केंद्रों में 'मिक्स्ड लैंड यूज' यानी आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को एक साथ चलाने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य शहर में बढ़ती आबादी के दबाव को कम करना और उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। 

आईटी पार्क में अब फ्लैट्स के साथ मिलेंगे प्लॉट
मास्टर प्लान में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव आईटी पार्क (IT Park) क्षेत्र के लिए प्रस्तावित है। यहां पहले केवल बहुमंजिला फ्लैट्स बनाने की योजना थी, लेकिन अब प्रशासन ने यहां प्लॉटेड डेवलपमेंट यानी स्वतंत्र प्लॉट देने का भी मन बना लिया है। गौरतलब है कि साल 2022 में पर्यावरण संबंधी चिंताओं और प्रवासी पक्षियों के मार्ग में बाधा आने की वजह से 700 फ्लैट्स के प्रोजेक्ट को हरी झंडी नहीं मिल पाई थी। अब रणनीति बदलते हुए यहां करीब 400 रिहायशी प्लॉट विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। 

मनीमाजरा में ऊंची इमारतों का सपना होगा सच 
मनीमाजरा इलाके में नगर निगम की भूमि पर अब 5 मंजिल तक के निर्माण की अनुमति दी जाएगी। आधुनिक शहरीकरण की जरूरतों को देखते हुए इन इमारतों में 'स्टिल्ट पार्किंग' (जमीन तल पर पार्किंग) को अनिवार्य बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट लगभग 7.7 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा, जहां फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को 2 तक रखने का सुझाव दिया गया है। इससे क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए जगह की समस्या काफी हद तक सुलझ सकेगी। 

औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को बड़ी राहत 
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 के उद्यमियों के लिए भी अच्छी खबर है। यहां औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए एफएआर (FAR) बढ़ाकर 2 करने की योजना है। साथ ही, खुले स्थान (Open Space) से जुड़े नियमों में लचीलापन लाया जाएगा ताकि औद्योगिक इकाइयां अपनी क्षमता का विस्तार कर सकें। 
• मिक्स्ड लैंड यूज: सेक्टर-43 सिटी सेंटर जैसे इलाकों में अब लोग एक ही छत के नीचे घर और दुकान दोनों रख सकेंगे।
• शिक्षा और व्यापार: शैक्षणिक संस्थानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए निर्माण संबंधी नियमों को सरल बनाया गया है ताकि नए स्कूल-कॉलेज और आधुनिक व्यावसायिक परिसर आसानी से बन सकें।

कामगारों के कल्याण पर विशेष ध्यान
शहर के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले श्रमिकों के लिए भी मास्टर प्लान में खास प्रावधान किए गए हैं। लेबर हाउसिंग के लिए आवंटित क्षेत्र को 2.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र का उपयोग केवल निर्धारित सुविधाओं के लिए होगा और यहां अलग से निजी रिहायशी यूनिट बनाने की इजाजत नहीं होगी। 

10 साल बाद पड़ी बदलाव की जरूरत 
चंडीगढ़ का मौजूदा मास्टर प्लान-2031 अप्रैल 2015 में लागू किया गया था। पिछले एक दशक में शहर की परिस्थितियों में भारी बदलाव आया है।
• आबादी का बढ़ता बोझ: जिस चंडीगढ़ को शुरुआत में महज 5 लाख लोगों के लिए डिजाइन किया गया था, वहां अब 12 लाख से अधिक आबादी रह रही है।
• संसाधनों पर दबाव: बढ़ती जनसंख्या के कारण यातायात, आवास और बुनियादी सुविधाओं पर अत्यधिक बोझ बढ़ गया है। 
• सीमित भूमि: चंडीगढ़ की भौगोलिक सीमाएं सीमित हैं, इसलिए उपलब्ध जमीन का ऊर्ध्वाधर (Vertical) और स्मार्ट उपयोग ही एकमात्र विकल्प बचा है। 

विकास को नई गति देने की पहल 
ये सभी बदलाव केंद्र सरकार के 'डिरेगुलेशन 2.0' अभियान का हिस्सा हैं। इस अभियान का मूल उद्देश्य जटिल और पुराने पड़ चुके नियमों को खत्म कर प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। नियमों में ढील मिलने से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और जो प्रोजेक्ट सालों से कागजों में दबे थे, उन्हें धरातल पर उतारा जा सकेगा। 

जनता की राय के बाद ही लगेगी अंतिम मुहर 
प्रशासन इन बदलावों को सीधे थोपने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करेगा। सबसे पहले मास्टर प्लान के इस नए ड्राफ्ट को सार्वजनिक किया जाएगा, जिस पर शहर के निवासी, व्यापारी और उद्योगपति अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद विशेषज्ञों की एक समिति इन सुझावों की समीक्षा करेगी। अंत में, सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा जाएगा।