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हाईकोर्ट: किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए और दो साल से कम की सजा पाए सभी लोगों को संसदीय या विधानसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार द्वारा दाखिल जवाब को अनुचित पाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया।  हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र 19 सितंबर तक  जवाब देने में विफल रहता है, तो ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर जवाब दाखिल करने का उसका अधिकार समाप्त हो जाएगा।

सजायाफ्ता नहीं लड़ सकता चुनाव

चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल खेत्रपाल की खंडपीठ ने एडवोकेट गणेश खेमका द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश पारित किए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार अभी तक दो साल से कम कारावास की सजा पाने वालों को चुनाव लड़ने की अनुमति है और किसी भी कानून की अदालत द्वारा दो साल या उससे अधिक कारावास की सजा पाने वालों को चुनाव लड़ने से रोका जाता है। याचिका के अनुसार जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 (3) में दो साल से कम कारावास की अवधि को अयोग्यता के गैर-कार्रवाई योग्य आधार के रूप में अलग करना, वास्तव में भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, क्योंकि यह एक ही समूह में एक कृत्रिम वर्गीकरण बनाने का प्रयास करता है। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस मुद्दे पर सुनवाई जरूरी है।

याचिकाकर्ता ने दिया यह तर्क

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि लिली थामस बनाम भारत संघ और अन्य में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, एक अयोग्यता जो किसी उम्मीदवार को सदन सदस्य के रूप में चुने जाने से रोकती है, वह सदन की सदस्यता से अयोग्यता के रूप में भी लागू होगी। नतीजतन, धारा 8 (3) के जारी रहने से न केवल एक दोषी को चुनाव लड़ने की अनुमति मिलती है, बल्कि सदन के एक दोषी सदस्य को अपनी सजा काटते हुए अपनी सीट पर बने रहने की भी अनुमति मिलती है। याचिकाकर्ता मुख्य रूप से धारा 8 (3) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देता है क्योंकि यह दो साल से कम की कारावास अवधि को अयोग्यता के गैर-कार्रवाई योग्य आधार के रूप में अलग करने में अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है।

समानता के अधिकार के खिलाफ नियम

याचिका के मुताबिक मौजूदा नियम समानता के अधिकार के खिलाफ है, क्योंकि अपराध तो अपराध होता है। चाहे यह छोटा हो या बड़ा। अगर किसी व्यक्ति को दो साल की सजा हुई है और किसी को दो साल से ज्यादा की सजा हुई है तो दोनों के मामलों में असमानता क्यों। सजा तो दोनों को हुई है। फिर दो साल से कम वाले को चुनाव लड़ने की छूट देना और दो साल से ज्यादा सजा होने वाले को चुनाव न लड़ने देने की इजाजत देना कितना उचित है।