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नरेन्द्र वत्स, रेवाड़ी: प्री-नेटल सेक्स डिटरमेशन के नाम पर दंपतियों को गुमराह करते हुए मोटा पैसा कमा रहे दलालों का नेटवर्क पूरे प्रदेश से लेकर पड़ोसी राज्यों तक में फैला है। दलाल गर्भ में शिशु लिंग की जांच के नाम पर दंपतियों को जाल में फंसाते हुए मोटा पैसा कमा रहे हैं, जबकि बदनामी का दाग अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के माथे पर लग रहा है। अल्ट्रासाउंड के बाद दलाल दंपतियों को गुमराह करते हुए गर्भपात की व्यवस्था तक करते हैं। मुख्य दलालों को काबू करने के स्वास्थ्य विभाग के प्रयास सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं।

पीएनडीटी एक्ट की सख्ती से अल्ट्रासाउंड संचालक सतर्क
पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पीएनडीटी एक्ट की सख्ती से पालना होने के कारण अधिकांश अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक किसी भी सूरत में सैक्स डिटरमेशन का कार्य करने को तैयार नहीं होते। इन अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों ने अपने सेंटरों पर सीसीटीवी कैमरों से लेकर फोन कॉल रिकॉर्डिंग तक की व्यवस्था की हुई है, ताकि झूठी शिकायत के आधार पर उन्हें जाल में नहीं फंसाया जा सके। इसी बात का फायदा कुछ बड़े दलाल खुलकर उठा रहे हैं। इन दलालों का नेटवर्क काफी बड़ा हो चुका है। वह खुद सामने आने की बजाय अपने गुर्गों को नामी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के बाहर गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों पर नजर रखने के लिए छोड़ देते हैं।

दलालों के बहकावे में आकर लोग हो रहे गुमराह
दलालों की तरफ से छोड़े गए गुर्गे धीरे-धीरे अल्ट्रासाउंड केंद्रों के स्टाफ सदस्यों से जान-पहचान बनाने में कामयाब हो जाते हैं, ताकि उसके सहारे वह अपने काम को आसानी से अंजाम दे सकें। जब इन गुर्गों के जाल में कोई फंसता है, तो यह बड़ी सफाई से अपने आका तक ग्राहक पहुंचाने का इंतजाम कर देते हैं। इसके बाद दलाल ग्राहक को पूरी तरह गुमराह करते हुए 50 हजार से एक लाख रुपए ऐंठने का पुख्ता इंतजाम कर लेता है। ग्राहक के संपर्क में आने के बाद उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए लगभग एक माह तक एक्सरसाइज की जाती है।

ऐसे शुरू होता है दलालों का खेल
अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के आसपास दलालों के गुर्गे किसी ने किसी रूप में मौजूद रहते हैं। उनकी निगाहें गर्भवती महिलाओं के परिजनों पर होती है। बातों ही बातों में यह पहले इस बात का पता लगाते हैं कि महिला के परिजन सैक्स डिटरमेशन कराना चाहते हैं या नहीं। अगर वो सैक्स डिटरमेशन कराने के लिए तैयार नजर आता है, तो उसे मेन दलाल तक पहुंचाने की व्यवस्था कर दी जाती है। गुर्गों का काम खत्म होने के बाद दलाल का खेल शुरू हो जाता है।

लोगों को ऐसे गुमराह कर रहे दलाल
सूत्रों के अनुसार ग्राहक फंसने के बाद दलाल सबसे पहले सैक्स डिटरमेशन की फीस तय करते हैं। यह 50 से 70 हजार रुपए तक हो सकती है। इसके बाद खुद को बचाने के लिए ग्राहक की कुछ दिनों तक ऑब्जर्वेशन कराई जाती है कि वह किसी के इशारे पर तो नहीं भेजा गया है। रास्ता साफ होने के बाद तय की गई फीस कैश लेने की बजाय ऑनलाइन ट्रांसफार्मर कराई जाती है। आधी से ज्यादा रकम अल्ट्रासाउंड कराने से पहले ही ले ली जाती है।

अल्ट्रासाउंड केंद्र तक छोड़ने का करते हैं काम
सूत्र बताते हैं कि सौदा तय होने के बाद दलालों के गुर्गे गर्भवती महिला को अल्ट्रासाउंड केंद्र तक पहुंचाने का काम करते हैं। कर्मचारियों से जान-पहचान के कारण नंबर पहले लगवा दिया जाता है, जिससे ग्राहक का दलाल पर विश्वास बढ़ जाता है। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में सिर्फ यही बताया जाता है कि गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ है या नहीं। इसके बाद दलाल ग्राहक के सामने फर्जी कॉल से इस बात की पुष्टि कराता है कि शिशु लड़का है या लड़की।

अब शुरू होता है कत्ल का कातिल खेल
महिला के गर्भ में चाहे लड़का पल रहा हो या लड़की, दलाल ग्राहक को गर्भ में लड़की होने की बात ही बताता है। जिन दंपतियों को पहले ही एक या इससे ज्यादा लड़कियां हैं, वह गर्भपात कराने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके बाद दलाल कोख में शिशु का कत्ल करने का इंतजाम भी 30 से 50 हजार रुपए में करता है। अगर कोई दंपति गर्भपात के लिए तैयार नहीं होता, तो लड़की बताने के बाद लड़का होने की स्थिति में मामला उजागर होता है। संदेह अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक पर ही होता है।

काबू करने के प्रयास लगातार जारी
सीएमओ डॉ. सुरेंद्र यादव ने बताया कि यह बात सही है कि दलाल आज भी लोगों को भ्रमित करते हुए गर्भ में भ्रूण हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भ्रूण जांच के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए काफी प्रयास किए हैं, लेकिन लोगों के सहयोग के बिना सफलता नहीं मिल पा रही है। आमजन को यह समझना चाहिए के भ्रूण लिंग की जांच के नाम पर दलाल उन्हें गुमराह करते हुए गर्भपात कराते हैं। ऐसे लोगों के बारे में सूचना देने वाले व्यक्ति को एक लाख रुपए के इनाम का प्रावधान है।