स्क्वाड्रन लीडर अनुज शर्मा की पार्थिव देह शनिवार को रोहतक जिले के उनके पैतृक गांव ककराना पहुंची। 

देश की सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारतीय वायुसेना के वीर सपूत, स्क्वाड्रन लीडर अनुज शर्मा की पार्थिव देह शनिवार को रोहतक जिले के उनके पैतृक गांव ककराना पहुंची। असम में हुए सुखोई-30 एमकेआई फाइटर प्लेन क्रैश में अनुज शर्मा की शहादत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पिता से मिली थी वायुसेना में जाने की प्रेरणा
9 अगस्त 1993 को गांव ककराना में जन्मे अनुज शर्मा का बचपन सैन्य परिवेश में बीता। उनके पिता आनंद शर्मा भारतीय सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हैं। पिता की देशभक्ति से प्रेरित होकर ही अनुज ने वायुसेना को अपना करियर चुना। 2015 में एयरफोर्स में चयनित होने के बाद जब 2016 में उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी, तो गांव ककराना में उनका भव्य स्वागत किया गया था। उनका छोटा भाई मनुज इंग्लैंड में कार्यरत है।

विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूटा संपर्क 
वायुसेना के अनुसार, स्क्वाड्रन लीडर अनुज वशिष्ठ और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरागकर ने असम के जोराहट एयरबेस से एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान भरी थी। शाम करीब 7:42 बजे विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया और यह रडार से ओझल हो गया। वायुसेना द्वारा तुरंत शुरू किए गए सर्च ऑपरेशन के बाद, जोराहट से करीब 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग के दुर्गम और घने जंगलों में विमान का मलबा मिला। वायुसेना ने पुष्टि की है कि इस हादसे में दोनों जांबाज अधिकारी शहीद हो गए हैं।

'भारत माता की जय' के साथ दी अंतिम विदाई
जैसे ही शहीद अनुज शर्मा की पार्थिव देह गांव पहुंची, वहां मौजूद लोगों ने 'भारत माता की जय' के नारों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरा गांव अपने लाडले की शहादत पर गर्व के साथ-साथ गहरे दुख में डूबा है।

अंतिम संस्कार के दौरान स्थानीय प्रशासन और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, जो उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई देंगे। देश का यह जांबाज बेटा हमेशा अपनी वीरता और साहस के लिए याद किया जाएगा।

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