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Kaithal: कोरोना महामारी के दौरान 2020-2021 में सरकार की ओर से जिला परिषद के माध्यम से गांवों में सफाई के लिए जारी की गई विशेष ग्रांट के तहत जिले में सात करोड़ रुपए के घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। इस कार्रवाई के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो कैथल की टीम ने कार्यकारी अभियंता, जेई, लेखाकार सहित चार ठेकेदारों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों ने फर्जी बिल बनाकर अपने खाते में सरकारी राशि को डाला था।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में ये लोग शामिल

एसीबी टीम द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में तत्कालीन एसडीओ व वर्तमान में रोहतक में कार्यरत कार्यकारी अभियंता नवीन कुमार, पिहोवा में कार्यरत जेई जसबीर, नारनौल में कार्यरत लेखाकार कुलवंत सहित गांव फतेहपुर के ठेकेदार अभय संधू, गांव फरियाबाद के दिलबाग, पूंडरी के अनिल और राजेश को गिरफ्तार किया। इस मामले में पिछले करीब चार साल से एसीबी की 10 टीमें जांच में जुटी हुई थी। इसमें नौ इंस्पेक्टर सहित दो डीएसपी जांच में जुटे हैं। पूरे मामले में एसीबी के डीजीपी अभिताभ ढिल्लों व अंबाला के एसपी कुशल सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई, जबकि इस मामले में डीएसपी पवन और ओमप्रकाश भी जांच कर रहे हैं।

16.31 करोड़ की ग्रांट, 10 करोड़ हुए जारी, 3 करोड़ के करवाए काम

गौरतलब है कि 16 करोड़ 31 लाख रुपए की ग्रांट में से करीब 10 करोड़ रुपए की राशि जारी हुई थी। इसमें से आरोपियों ने गांवों में महज तीन करोड़ रुपए के ही काम करवाए, जबकि सात करोड़ रुपए की राशि गांवों में काम न करवाकर आरोपियों ने अपने खाते में ट्रांसफर कर ली। अब एसीबी की टीम इन आरोपियों को बुधवार न्यायालय में पेश करेगी। इस मामले में भाजपा विधायक लीला राम की ओर से सरकार को दी गई शिकायत के बाद जांच शुरू हुई थी। इसके बाद एसीबी ने करीब तीन साल तक चली जांच के आधार पर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस मामले में अभी आठ आरोपियों को ओर गिरफ्तार किया जाना बाकी है। एसीबी के अनुसार जिप के पूर्व डिप्टी सीईओ जसविंद्र भी मामले के मुख्य आरोपी हैं।

2021 में विधायक लीला राम ने दी थी शिकायत

एंटी करप्शन ब्यूरो के इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने बताया कि 2021 में विधायक लीला राम ने सरकार को शिकायत दी थी कि ग्रामीण क्षेत्र में सफाई करवाने को लेकर जिले में करोड़ों का घोटाला किया गया है। सरकार द्वारा जांच का जिम्मा एंटी करप्शन को दिया गया था। उसी समय से मामले की जांच की जा रही थी। जांच के दौरान करीब 7 करोड़ से अधिक का घोटाला सामने आया। मामले में 15 व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें डिप्टी सीइओ जसविंद्र सिंह भी शामिल हैं।

15 लोगों ने मिलकर किया था 7 करोड़ का गबन

एंटी करप्शन ब्यूरो के इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2020-2021 में सरकार की ओर से जिला परिषद के माध्यम से गांवों में सफाई के लिए जारी की गई विशेष ग्रांट में 15 लोगों ने करीब सात करोड़ रुपए का गबन किया। इस मामले में अभी तक पंचायती राज के एक्सईएन, जेई व लेखाकार और ठेकेदार सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने करीब पांच करोड़ रुपए फर्जी बिल बनाकर अपने खाते में रुपए ट्रांसफर किए हैं।