खेतों तक जाने वाले रास्ते की मांग को लेकर गांव सपेड़ा के पास पिछले 10 दिनों से धरने पर बैठे किसानों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की।

हरियाणा के अंबाला में विकास परियोजनाओं और स्थानीय किसानों के हितों के बीच टकराव एक बार फिर हिंसक मोड़ ले चुका है। गुरुवार सुबह निर्माणाधीन रिंग रोड के पास खेतों के रास्ते की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। प्रशासन ने न केवल किसानों के धरने वाले तंबू उखाड़ दिए, बल्कि कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी ले लिया। इस कार्रवाई के विरोध में आक्रोशित किसान अंबाला-जगाधरी नेशनल हाईवे की ओर कूच कर गए हैं।

10 दिन से जारी था धरना
पूरा विवाद रिंग रोड परियोजना के कारण खेतों तक पहुंचने वाले रास्तों के बंद होने से जुड़ा है। गांव सपेड़ा और इसके आसपास के किसान पिछले 10 दिनों से धरने पर बैठे थे। उनकी मुख्य चिंता यह है कि रिंग रोड का निर्माण होने के बाद उनके खेतों तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं बचेगा। इसके साथ ही, किसानों ने आशंका जताई है कि इस निर्माण से बरसाती पानी की निकासी का प्राकृतिक रास्ता भी बाधित हो जाएगा, जिससे फसलों को नुकसान हो सकता है। 

एनएचएआई और किसानों में नहीं बनी सहमति
किसानों का आरोप है कि वे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रहे थे, लेकिन विभाग ने उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। गुरुवार को जब किसानों ने निर्माणाधीन मशीनों की घेराबंदी करने का प्रयास किया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने किसानों को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग किया और उन्हें बसों में भरकर वहां से हटाना शुरू कर दिया।

5 नेशनल हाईवे को जोड़ने वाली है ड्रीम परियोजना
अंबाला में बन रहा यह रिंग रोड रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इसका आधे से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। यह प्रोजेक्ट अंबाला के आसपास के 5 प्रमुख नेशनल हाईवे को आपस में जोड़ेगा। 
1. अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे (NH-152)
2. अंबाला-रुड़की हाईवे (NH-344)
3. अंबाला-जगाधरी हाईवे (NH-444A)
4. दिल्ली-अमृतसर हाईवे (NH-44)
5. अंबाला-हिसार हाईवे (NH-65)

नेशनल हाईवे पर भारी पुलिस बल तैनात 
पुलिसिया कार्रवाई के बाद गुस्साए किसान अंबाला-जगाधरी नेशनल हाईवे जाम करने की योजना बना रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेशनल हाईवे पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी कीमत पर यातायात बाधित न हो और रिंग रोड का काम सुचारू रूप से चलता रहे। वहीं, किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें खेतों के लिए स्थाई रास्ता और पानी की निकासी का समाधान नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। 

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