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योगेंद्र शर्मा, चंडीगढ़: हरियाणा में जीती हुई बाजी हाथ से निकल जाने के बाद कांग्रेस में चिंतन-मंथन का दौर शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाई कमान खुद राहुल गांधी और कांग्रेस के सियासी दिग्गज हरियाणा को लेकर बारीकी से चिंतन-मंथन में जुटे हुए हैं। भाजपा द्वारा ओबीसी कार्ड खेल दिए जाने के बाद कांग्रेस के अंदर लगातार चिंतन मंथन का दौर चल रहा है। नेता विपक्ष और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व उनके बेटे सांसद दीपेंद्र हुड्डा के विरुद्ध रोहतक में ही आवाज उठनी शुरू हो गई है।
भूपेंद्र व दीपेंद्र की नाराजगी सता रहा डर
प्रदेश में लगातार कांग्रेस की सरकार बनने और प्रचंड बहुमत आने के दावे के साथ ही एग्जिट पोल ने भी हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बना दी थी। पोस्टल बैलेट के रुझानों में कांग्रेस आगे थी और आठ अक्टूबर को मतगणना वाले दिन 10 बजे औऱ इसके बाद माहौल पलटता हुआ चला गया। भरोसेमंद उच्च पद पर बैठे सूत्रों का कहना है कि भाजपा की तर्ज पर हरियाणा में कांग्रेस आने वाले समय में ओबीसी और गैर जाट चेहरों को आगे ला सकती है। पार्टी के अंदर ही वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला और पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद सैलजा इस बार के चुनाव में अच्छे खासे मुखर रहे हैं। वह हरियाणा के अंदर दलित चेहरे को स्थान दिए जाने के पक्ष में थे, लेकिन पार्टी हाई कमान और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को भूपेंद्र हुड्डा और उनके समर्थकों द्वारा विद्रोह कर दिए जाने की आशंका थी।
बाबरिया व सैलजा में बना 36 का आंकड़ा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी उदयभान भले ही चुनाव हार गए हो, लेकिन वह भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी है। उन्होंने ही उदयभान को प्रदेश अध्यक्ष बनावाया था। इसके अलावा हरियाणा कांग्रेस मामलों के प्रभारी बाबरिया भी भूपेंद्र हुड्डा के करीबी हैं। बाबरिया और सैलजा के बीच 36 का आंकड़ बन गया था, क्योंकि बाबरिया नेता विपक्ष और पूर्व सीएम खेमे में गिने जाते हैं। इस बात को लेकर सैलजा विधानसभा चुनावों के दौरान मुखर रही। कांग्रेस के दिल्ली एआईसीसी में बैठकों का दौर चला, जिसमें दोनों के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग विचारधारा और फीडबैक रहा। साथ ही गरमा-गरम बहस भी हुई।
नेता विपक्ष हुड्डा ने बनानी शुरू कर दी थी सूचियां
हरियाणा के वरिष्ठ नेता और 10 साल मुख्यमंत्री रहने वाले नेता विपक्ष भूपेंद्र हुड्डा और उनके समर्थ कौन है। प्रदेश के अंदर कांग्रेस की सरकार बन जाने को लेकर अति आत्मविश्वास जताया। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को लगता था कि उनकी सरकार बनने जा रही है, क्योंकि लोग उनके साथ है, इसलिए पूरे प्रदेश में यह बात उड़ रही थी कि कांग्रेस का चुनाव जनता लड़ रही है। कुल मिलाकर विधानसभा चुनाव में आते-आते बाजी पलट गई और कांग्रेस के हाथ से सरकार बनाने का मौका चूक गया। हार जाने के बाद भी कांग्रेस के अंदर लगातार घमासान की स्थिति है।
सैलजा समर्थकों ने खोला मोर्चा
सैलजा के समर्थक विधायक शमशेर गोगी के इलाके में राहुल गांधी ने आकर सभा की थी। गोगी ने नेता विपक्ष और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। भूपेंद्र हुड्डा व उनके सांसद बेटे दीपेंद्र के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी प्रकार से कांग्रेस के अन्य कई नेता मुखर हैं। अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा और चौधरी उदयभान पर बरस रहे हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस के अंदर आने वाले दिनों में वरिष्ठ नेताओं को पीछे धकेला जा सकता है। इसके साथ ही नए पीसीसी चीफ की नियुक्ति भी हो सकती है। इसको लेकर सांसद राहुल गांधी के साथ चिंतन-मंथन करने में जुटे हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने साफ कर दिया कि हार की समीक्षा होगी।
हार के बाद आत्मनिरीक्षण की सलाह दे रही सैलजा
सैलजा हार के बाद भी नतीजों को लेकर आत्म निरीक्षण करने की सलाह दे रही है। इतना ही नहीं, कांग्रेस शासन काल के समय से पार्टी के वरिष्ठ नेता और अहीर बेल्ट में प्रमुख चेहरा कैप्टन अजय यादव भी भूपेंद्र हुड्डा के विरुद्ध आवाज उठाते रहे हैं। वे ओबीसी विंग राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने चुनाव के नतीजे आ जाने के बाद नाराजगी जाहिर की। यह भी बताया जा रहा है कि खुद राहुल गांधी भी कांग्रेस के अंदर गुटबाजी व कलह से बहुत ज्यादा नाराज है, जिस कारण कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव हो सकते हैं। विधायक चुने जाने के बाद विधायक दल का नया नेता चुना जा सकता है। कांग्रेस के अंदर नेता विपक्ष पद को लेकर और प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अभी से नाम को लेकर नाम पर मंथन शुरू हो चुका है।
