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योगेंद्र शर्मा, हरियाणा: आखिरकार लोकसभा चुनावों में पांच सीटें खो देने के बाद नायब सैनी सरकार एक्शन मोड़ में है। गलत तरीके से पेंशन लेने वालों को नोटिस भेजे जाने वाले सात जिलों के प्रभारी, चार जिला समाज कल्याण अधिकारियों को ठीक मतदान से पहले ही निलंबित कर दिया गया। खास बात यह है कि हाई कोर्ट के आदेशों और प्रदेश मुख्यालय के अफसरों के फरमान के बाद गलत तरीके से पेंशन लेने वालों को रिकवरी नोटिस भेज दिए थे।

निलंबित किए अधिकारियों में ये शामिल

जानकारी अनुसार जिन जिला समाज कल्याण अफसरों पर गाज गिरी है, उनमें यमुना नगर के ईश्वर राठी, करनाल के सत्यवान ढिलौड (अतिरिक्त कार्यभार कैथल) और रविंद्र पानीपत अतिरिक्त कार्यभार सोनीपत, जितेंद्र ढिल्लो गुरुग्राम अतिरिक्त कार्यभार मेवात को निलंबित कर चार्जशीट थमा दी गई है। खास बात यह है कि इनसे पांच दिनों में जवाब मांगा गया है। इन सभी अधिकारियों को मतदान से पहले निलंबित कर दिया और बाद में चार्जशीट थमा दी। वैसे, पूरे मामले में लोकसभा चुनाव में हुए नुकसान और अफसरों पर शिकंजा कसे जाने के बयानों को लेकर विपक्षी नेताओं ने मुद्दा बना लिया था। सत्तापक्ष की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि इन अधिकारियों ने नकारात्मक भूमिका निभाई।

अधिकारी धर्मसंकट में, इधर कुंआ, उधर खाई

जिला समाज कल्याण अधिकारियों के सामने धर्म संकट के हालात बने हुए हैं। एक तरफ जहां गलत पेंशन लेने वालों को हाई कोर्ट के आदेश अनुसार नोटिस देकर रिकवरी की जानी जरूरी थी। साथ ही हर सप्ताह होने वाली बैठकों में उनकी क्लास लगाई जा रही थी। सीएमओ और संयुक्त निदेशक द्वारा समीक्षा के दौरान मुख्यालय रिकवरी के बारे में अपडेट मांगा जाता था। बीच में फंसे जिला स्तर के इन अफसरों की जान सांसत में फंसी हुई थी। दबाव में आकर उन्होंने बड़ी संख्या में नोटिस वितरित कर दिए।

करनाल लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले

खास बात यह है कि सीएम सिटी कहे जाने वाले और लोकसभा क्षेत्र करनाल में सबसे ज्यादा नोटिस भेजे गए थे। जिसके कारण जहां जहां पर भी विधायक, पूर्व विधायक और नेतागण गए लोगों ने रोना रोया इससे नाराज जनप्रतिनिधियों ने पूरा फीडबैक सीएम और पूर्व सीएम को दिया। जिसके बाद में सीएम और पूर्व सीएम ने साफ कर दिया था कि चुनाव के दौरान नकारात्मक काम करने वाले अफसरों पर शिंकजा कसा जाएगा।

प्रदेश में लगभग 30 हजार की पेंशन विभिन्न कारणों से रोकी गई

पूरे प्रदेश भर के सभी जिलों में पीपीपी (कमियों) के कारण लगभग 30 हजार बुढ़ापा पेंशन रोक दी गई थी। इस पूरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई, जब फील्ड में चुनावी मुहिम के दौरान शोरगुल मचा, तो आला-अफसरों ने पेंशन शुरु कराकर मामले को शांत कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि पेंशन परिवार पहचान पत्र वैरिफाई नहीं होने और उसमें अन्य कमियां होने के कारण दो से तीन माह की पेंशन रोक दी गई। मामला प्रदेश मुख्यालय से लिए गए फैसले के अनुसार हुआ। लेकिन पूरे मामले में अफसरशाही इसलिए खामोश रही क्योंकि मुख्यमंत्री आफिस से पीपीपी को सौ फीसदी लागू कराने का दबाव बनाया जा रहा था।

पेंशन रोकने को लेकर अधिकांश जिलों में हुआ बवाल

पेंशन रोक दिए जाने के मामले को लेकर चुनावी सीजन के कारण अधिकांश जिलों में बवाल हुआ और लोगों ने विधायकों, लोकसभा उम्मीदवारों, उनके नजदीकियों के सामने गुस्सा उतारा। जिसके बाद मामला पूर्व सीएम मनोहरलाल खट्टर व सीएम नायब सैनी के पास में पहुंचा। उच्च स्तर पर संज्ञान लेने के बाद पेंशन की दोबारा शुरुआत करनी पड़ी। खास बात यह है कि बिना जांच पड़ताल और पीपीपी के ही पेंशन शुरू कर दी गई।

मृतकों को पेंशन बांटने पर नाराज हाई कोर्ट ने दिए थे रिकवरी के आदेश

मरने वालों और अन्य को गलत ढंग से पेंशन बांटने के मामले में पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट की ओर से रिकवरी करने के आदेश हरियाणा सरकार और विभाग को दिए थे। हाई कोर्ट के सख्त होने के कारण विभाग में हड़कंप मचा था, जिसके बाद में पहले चरण में आठ अधिकारियों को चार्जशीट कर दिया गया था। जिसके बाद में अब चार पर गाज गिरा दी गई है। इनको भी चार्जशीट थमा दी गई है। दो अन्य कर्मचारी भी निलंबित कर दिए गए हैं।

विधानसभा चुनाव सिर पर, चुनाव में हुए नुकसान की भरपाई में जुटे नेता

हरियाणा में आने वाले वक्त में विधानसभा के चुनाव सिर पर हैं, इसलिए सत्ताधारी भाजपा के सियासी दिग्गज डैमेज कंट्रोल में लगे हुए हैं। मामले में पेंशन रोक दिए जाने और गलत लोगों को पेंशन देने, रिकवरी के नोटिस दिए जाने के अलावा सरपंचों, पंचों की नाराजगी के साथ ही परिवार पहचान पत्र, प्रापर्टी आईडी जैसे विषयों को लेकर लोगों की नाराजगी दूर करने के लिए सभी विधायकों ने अभी से बैठकों का दौर शुरु कर दिया है।