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नारनौंद: आईकॉनिक साइट राखीगढ़ी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस पर नौ टीलें चिन्हित किए गए हैं। इन टीलों पर खुदाई के दौरान ऐसे अवशेष मिल चुके हैं जो काफी चौंकाने वाले हैं। गांव से शहरीकरण इसी सभ्यता की शुरुआत है। हजारों साल पहले व्यापार करने के भी काफी सबूत मिल चुके हैं। ऐतिहासिक सभ्यता होने के बावजूद अभी तक सरकार इन टीलों को संरक्षित नहीं कर सकी। टीलों पर ग्रामीणों ने अतिक्रमण किया हुआ है, जिसके कारण पर्यटक भी बहुत ही कम संख्या में पहुंच रहे हैं।
पुरातत्व विभाग ने लगा रखी है ग्रिल
टीलें नंबर एक पर पुरातत्व विभाग ने चारों तरफ ग्रिल लगाई हुई है लेकिन उसके बावजूद भी ग्रामीणों ने इस टीले पर श्मशान घाट बनाया हुआ है और वे यहीं पर दाह संस्कार करते हैं। जब भी कोई देश-विदेश का पर्यटक वहां पर पहुंचता है तो श्मशान घाट देखकर चौंक जाता है। टीलें नंबर दो पर भी ग्रामीणों के मकान है। टीलें नंबर तीन पर भी एक समुदाय के लोग वहां पर अपने मुर्दों को दफनाते हैं। टीला नंबर चार और पांच पर अधिकतर ग्रामीणों के मकान हैं और ग्रामीण इन्हीं मकान में रहते हैं।
टीला नंबर 6 व 7 काफी महत्वपूर्ण
राखीगढ़ी में टीला नंबर छह और सात काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन टीलों पर सबसे पहले 1997 - 98 में खुदाई भारतीय पुरातत्व विभाग के डायरेक्टर अमरेंद्र नाथ की अगुवाई में की गई थी। दूसरी बार डेक्कन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर वसंत शिंदे के नेतृत्व में वर्ष 2013-14 में की गई थी। तीसरी बार भारतीय पुरातत्व विभाग ने 2023- 24 में की थी। फिलहाल इन टीलों पर खुदाई बंद है।
20 हेक्टेयर में फैला टीला नंबर 6
टीला नंबर छह 20 हेक्टेयर में फैला हुआ है और यह जमीन किसानों के नाम पर है। इसलिए काफी समय से भारतीय पुरातत्व विभाग इस जमीन को संरक्षित करने की योजना पर काम कर रहा है। किसानों को नोटिस भी दिए जा चुके हैं। टीला नंबर छह पर खुदाई के दौरान काफी महत्वपूर्ण अवशेष मिले थे। जिममें मकान की दीवार, कच्ची ईटें, बर्तन, तांबा, पत्थर के मनके, शील, शंख की चूड़ियां इत्यादि काफी अवशेष मिले थे। जब उनकी कार्बन डेटिंग करवाई गई तो यह करीब साढ़े छह हजार वर्ष पुराने थे। जो हड़प्पन की शुरुआत मानी जाती हैं।
टीले नंबर 7 की तीन बार हो चुकी खुदाई
टीला नंबर सात करीब साढ़े तीन हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस टीले पर भी तीन बार खुदाई हो चुकी है। टीले पर मिले कंकाल के डीएनए से ही यह साबित हुआ था कि वह साढ़े चार हजार वर्ष पुराने है। टीले पर अब तक करीब 80 कंकाल मिल चुके है। गांव के सरपंच मनीष कुमार ने बताया कि ग्रामीणों को काफी बार नोटिस दिए जा चुके हैं कि वह इन टीलों पर अतिक्रमण न करें। टीला एक पर जो श्मशान घाट है, उस पर अंतिम संस्कार करने के लिए रोक लगाई हुई है लेकिन ग्रामीण वहीं पर संस्कार कर रहे हैं।
