Women Reservation Bill 2026: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) पास नहीं होने पर नाराजगी जताई है, इसे लेकर उन्होंने एक्स हेंडल पर वीडियो शेयर करके प्रतिक्रिया दी है।
सीएम रेखा गुप्ता ने वीडियो में विपक्ष की पार्टियों पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वुमन रिजर्वेशन बिल गिर गया और कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने साथ नहीं दिया।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि महिलाएं विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचे। अलग-अलग कारण बताकर विपक्ष आज विरोध कर रहा है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि देश की करीब 70 करोड़ महिलाएं अपने हक के लिए आवाज उठा रहीं थीं, लेकिन इस पर भी राजनीति की गई है।
कुछ नेताओं के अपने घरों की महिलाएं अच्छी लगती है-सीएम रेखा गुप्ता
वीडियो में सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि कुछ नेताओं को केवल अपने घरों की महिलाएं अच्छी लगती हैं, उन्होंने आगे कहा कि अखिलेश यादव को डिंपल यादव और राहुल गांधी को सानिया गांधी और प्रियंका गांधी। सीएम ने कहा कि देश की जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ सीटों में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि 1971 में 543 सीटें इस देश की तय हुई उस समय जनसंख्या कितनी थी, 50 करोड़ और 55 करोड़ और आज कितनी जनसंख्या है पूरे देश में 140 करोड़, तो क्या सीटें नहीं बढ़नी चाहिए? लेकिन आपको समस्या है कि सीटें क्यों बढ़ा रहे हैं, क्योंकि एक-एक मठाधीश 50-50 लाख वाली जनसंख्या का राजा बन कर बैठा हैं।
तुलना तो बड़े-बड़े देशों से करते हैं
सीएम रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि आप चाहते ही नहीं कि कोई महिला आगे आ जाए, कोई प्रतिनिधित्व कर दे। क्यों 1971 की जनगणना पर आधारित 543 सीटें हम लेकर बैठें हैं। अगर आपको तुलना करनी हो तो बहुत बड़े-बड़े देश के साथ करते हैं, लेकिन वहां की महिलाओं का प्रेजेंटेशन भी देखिए, ये आपका महिला विरोधी चेहरा है, जो इस देश की महिलाओं ने देख लिया। जब आप जाएंगे अपने क्षेत्र में तो आपसे हर एक महिला पूछेगी आपने ऐसा क्यों किया?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐसा प्रस्तावित कानून है, जिसके माध्यम से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।
आज के दौर में महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे देखा जा सकता है, लेकिन राजनीति में उनकी संख्या आज भी बहुत कम है, इसलिए लंबे वक्त से इस कानून की मांग उठाई जा रही है, ताकि महिलाओं को बराबर अधिकार मिल सके।