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तरुणा साहू- डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। निकाय चुनाव के लिए 11 फ़रवरी को मतदान होगा जबकि 15 फ़रवरी को मतगणना की जाएगी। इस बार पूर्व की कांग्रेस सरकार में गठित कई नगर पंचायतों में पहली बार चुनाव होंगे। इनमें से एक नगर पंचायत लाल बहादुर नगर भी शामिल है। राजनीतिक परिदृश्य से यह नगर भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में आइये जानते हैं यहां की राजनीतिक पृष्ठभूमि के बारे में।
नगर पंचायत बनने से पहले लाल बहादुर नगर को डोंगरगढ़ ब्लॉक का सबसे बड़ा गांव माना जाता था। यहां की अनुमानित आबादी 8 हजार के करीब है। आस-पास के ज्यादातर गांवों के लोग दैनिक जरूरत की चीजों के लिए एलबी नगर पर ही निर्भर रहते हैं। आईटीआई, कॉलेज, अस्पताल जैसी सुविधाओं से युक्त पूर्व में 20 वार्डों वाले इस गांव के लोग लंबे समय से तहसील बनाने की मांग कर रहे थे। जिसके बाद तत्कालीन सरकार ने नगर पंचायत बनाने की घोषणा की थी। वहीं नगर पंचायत बनने के बाद यहां पहली बार चुनाव होगा।
भाजपा- कांग्रेस ने साहू उम्मीदवारों पर खेला दांव
नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने भूत पूर्व सरपंच देवेंद्र साहू पर दांव खेला है। देवेंद्र साहू भाजपा के वरिष्ट और राजनीतिक रूप से सक्रिय नेता हैं। वहीं कांग्रेस ने राजू साहू को अपना उम्मीदवार बनाया है। राजू साहू एक बार जनपद पंचायत डोंगरगढ़ के सदस्य रह चुके हैं। दोनों पार्टी के उम्मीदवार एक ही परिवार से ताल्लुक रखते हैं। साथ ही गांव में राजनीतिक छवि और पकड़ भी अच्छी खासी है।
जातिगत समीकरण
जातिगत समीकरण की बात करे तो यह साहू बहुल इलाका है। पिछले साल हुए साहू समाज के सर्वे के अनुसार, नगर में 350 घर के साहू हैं। जिनकी अनुमानित आबादी 1 हजार से अधिक है। वहीं नगरीय निकाय क्षेत्रान्तर्गत प्रस्तावित नवीन वार्ड परिसीमन की जनसंख्या के अनुसार, नगर पंचायत में कुल 15 वार्ड हैं। जिसकी कुल जनसंख्या 4 हजार 538 है। इनमें से OBC वर्ग की जनसंख्या 70% है। अन्य आबादी 30% है। वहीं अनुसूचित जाति 5.13%, अनुसूचित जनजाति की संख्या 2.34% है।
जातिवादी राजनीति का असर कम
साहू बहुल होने के बाद भी यहां की जनता ने अन्य वर्गों के प्रतिनिधियों को भी पूरा मौका दिया। गांव से पहले हीरा सोनी सरपंच रह चुके हैं। साथ ही उनकी पत्नी भी सरपंच रह चुकी हैं। भाजपा के भूतपूर्व विधायक खेदुराम साहू इसी गांव से हैं, जिन्होंने साल 2008 में पहली बार भाजपा से जीत दर्ज की थी। लेकिन दूसरी बार पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया। वहीं चुनाव में दोनों पार्टियों ने साहू समाज के चेहरों पर भरोसा जताया है। यहां के मतदाता का मत किसको जाएगा ये तो परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा। इस इलाके की राजनीति जातिवाद पर निर्भर न होकर व्यक्तिवाद पर ध्यान केन्द्रित करती है।
लंबे समय से उठ रही थी तहसील बनाने की मांग
साल 2022 में विधानसभा के मानसून सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश की 15 नई तहसीलों के लिए घोषणा करते हुए स्थापना के लिए संभावित व्यय पेश किया था। जिसमें लाल बहादुर नगर भी शामिल था। 12 नवंबर 2022 को लाल बहादुर नगर में भेंट-मुलाकात के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने महत्वपूर्ण घोषणाएं की थी। जिनमें नगर पंचायत बनाने, स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने का ऐलान किया था। लंबे समय के इंतजार के बाद आख़िरकार सबसे बड़े ग्राम को अलग तहसील का दर्जा मिला। इस नगर पंचायत का शुभारंभ पूर्व सीएम बघेल ने वर्चुअल माध्यम से 18 अक्टूबर 2022 को किया था। इस तहसील में 39 ग्राम पंचायत और 70 गांव शामिल है।
