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रायपुर। आयुष्मान स्वास्थ्य योजना की तरह बीजू स्वास्थ्य कार्यक्रम में भी सामान्य समस्या वाले मरीजों का इलाज आईसीयू में किया गया था। इस मामले में आठ अस्पतालों पर कार्यवाही की तलवार लटक रही है। इन अस्पतालों से शो कॉज नोटिस में मिले जवाब पर मंथन का काम चल रहा है। जिन अस्पतालों को जांच के दायरे में रखा उनमें कुछ मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल राजधानी से संबंधित है। आयुष्मान की तुलना में दो गुना अधिक राशि वाले बीएसकेवाय से ओडिशा के मरीजों के इलाज को राजधानी के कई बड़े अस्पतालों ने प्राथमिकता में ले रखा है। मरीजों को रिझाने और आकर्षित करने के लिए इनके द्वारा ओपीडी में निशुल्क जांच की योजना भी संचालित कर रखी है।

पिछले दिनों जिस अस्पताल में गड़बड़ी मिली थी वहां तो मरीज की दूसरी बीमारी का ही इलाज कर दिया गया था और हालत बिगड़ने पर उसने दम तोड़ दिया था। इस अस्पताल के साथ रायपुर जिले से जुड़े आठ अन्य अस्पतालों पर भी कार्रवाई लंबित है। बीजू स्वास्थ्य कार्यक्रम योजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक नोटिस, जवाब का काम पूरा हो चुका है अब इन अस्पतालों पर की जाने वाली कार्यवाही के लिए गड़बड़ी की गंभीरता पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फैसला शीघ्र लिया जाएगा क्योंकि वहां स्वास्थ्य योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों की एक बड़ी टीम जिम्मेदारी संभाल रही है।

यहां अब तक चार पर कार्रवाई

हाल ही में आयुष्मान स्वास्थ्य योजना में सामान्य समस्या वाले मरीजों को गंभीर बताकर पैकेज ब्लाक करने के मामले में नोडल एजेंसी द्वारा चार अस्पतालों पर जुर्माना, निलंबन की कार्यवाही की गई है। मामला सामने आने के बाद जिन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया था उनमें राजधानी समेत रायपुर जिले के भी बड़े अस्पताल शामिल थे मगर एक्शन दुर्ग, राजनांदगांव, गरियाबंद और महासमुंद जिले के अस्पतालों पर लिया गया है।

भुगतान का रोना, मगर लाइन भी लंबी

स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत मरीजों के उपचार के बाद मिलने वाली राशि के भुगतान में देरी का रोना निजी अस्पतालों द्वारा अक्सर रोया जाता है। इसके बाद भी योजना के तहत मरीजों का इलाज करने के लिए इंपैनल्ड सूची में शामिल होने लंबी लाइन लगी रहती है। अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे अस्पतालों के आवेदन लंबित है जिस पर अंतिम विचार के लिए जिला स्तर पर उनकी निगरानी की जा रही है।