मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विशेष पहल पर बस्तर की आदिम संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं के संरक्षण  के लिए आयोजित संभागस्तरीय बस्तर पंडुम में सुकमा जिले ने सफलता का परचम लहराया है। 

लीलाधर राठी- सुकमा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विशेष पहल पर बस्तर की आदिम संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं के संरक्षण  के लिए आयोजित संभागस्तरीय बस्तर पंडुम में सुकमा जिले ने सफलता का परचम लहराया है। जगदलपुर के लाल बाग मैदान में आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा के कलाकारों को उनकी उत्कृष्ट प्रतिभा के लिए पुरस्कृत किया।

शानदार प्रदर्शन 12 में से 8 विधाओं में जीत
कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर के कुशल मार्गदर्शन में सुकमा जिले के 69 प्रतिभागियों ने नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों से आकर अपनी कला का लोहा मनवाया। जिले ने कुल 12 विधाओं में से 8 में पुरस्कार जीतकर अपनी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रदर्शन किया। प्रथम पुरस्कार पारंपरिक वेशभूषा और स्थानीय नाट्य कला, द्वितीय पुरस्कार क्षेत्रीय नृत्यकला, पारंपरिक वाद्य यंत्र, वस्त्र-आभूषण, स्थानीय पेय और आंचलिक साहित्य, तृतीय पुरस्कार स्थानीय व्यंजन को मिला है।

वहीं विजेता प्रतिभागियों को प्रशासन की ओर से सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि चेक प्रदान की गई। 

  • प्रथम स्थान 50,000 रुपये एवं स्मृति चिह्न
  •  द्वितीय स्थान 30,000 रुपये एवं स्मृति चिह्न
  •  तृतीय स्थान 20,000 रुपये एवं स्मृति चिह्न

इसके कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले सभी कलाकारों को 10,000 रुपये की सांत्वना राशि दी गई, जो कलाकारों के मनोबल को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सही मार्गदर्शन मिले, तो देश के मानचित्र पर अपनी पहचान बना सकते हैं
कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि,  बस्तर पंडुम कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की कला-संस्कृति से जुड़ने का एक माध्यम है। जिले के कलाकारों ने साबित कर दिया है कि यदि सही मंच और मार्गदर्शन मिले, तो वे देश के मानचित्र पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

सांस्कृतिक पुनरुद्धार की नई किरण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर की भाषा शैली, खान-पान और लोक परंपराओं को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राष्ट्रपति महोदया और केंद्रीय गृहमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया, जिससे सुकमा के आदिवासी कलाकारों में एक नया आत्मविश्वास जागा है।