सुकमा जिले में कलेक्टर अमित कुमार ने बगीचा पारा आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण कर बच्चों और महिलाओं से सीधे संवाद किया।

सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले प्रशासन जब संवेदनशीलता के साथ आमजन के बीच उतरता है, तो विकास की रफ्तार को नई दिशा मिलती है। इसी क्रम में शनिवार को कलेक्टर अमित कुमार ने बगीचा पारा आंगनबाड़ी केंद्र सुकमा का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और हितग्राहियों से सीधे संवाद स्थापित किया। 

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने औपचारिकताओं से परे जाकर बच्चों एवं माताओं के साथ ज़मीन पर बैठकर चर्चा की। उन्होंने तीन वर्षीय बालक शिवांश से आत्मीय संवाद करते हुए बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं नियमित उपस्थिति के बारे में जानकारी ली। प्रशासन के इस मानवीय व्यवहार से उपस्थित ग्रामीण महिलाओं ने खुलकर अपनी समस्याएं एवं सुझाव साझा किए।‘वजन त्यौहार’: आंकड़ों से आगे, भविष्य की सुरक्षा
9 से 18 फरवरी तक आयोजित वजन त्यौहार और सुपोषण चौपाल के तहत कलेक्टर ने स्वयं एक नवजात शिशु की ऊंचाई मापकर अभियान की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि, यह केवल पोर्टल एंट्री की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जिले के 28,170 बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने का संकल्प है। कलेक्टर अमित कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि, जिले की कोई भी बच्चा कुपोषण की श्रेणी में न रहे। प्रत्येक माता को अपने बच्चे के आदर्श वजन एवं ऊंचाई की जानकारी हो तथा पूरक पोषण आहार की उपलब्धता सुनि​​​​​​​श्चित की जाए।

26 आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण
निरीक्षण के दौरान प्राप्त सुझावों के आधार पर कलेक्टर ने सुकमा नगरपालिका क्षेत्र के सभी 26 आंगनबाड़ी केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। शौचालय की समुचित एवं कार्यशील व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना, मूलभूत आवश्यकताओं के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना जरूरी है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पंजी का अवलोकन किया, पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता की समीक्षा की तथा गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं के टीकाकरण की प्रगति की जानकारी ली।

सामूहिक प्रयास से सुपोषित सुकमा का निर्माण
कलेक्टर ने माताओं एवं पालकों से आह्वान किया कि, वे बच्चों के संतुलित आहार में स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें तथा नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं। उन्होंने कहा कि, जिला प्रशासन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं समुदाय के संयुक्त प्रयास से ही कुपोषण मुक्त सुकमा का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।