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नई दिल्ली में आयोजित ‘मेरी परंपरा-मेरी सांस्कृतिक विरासत’ राष्ट्रीय कार्यशाला में सुकमा के जिला पंचायत सदस्य हूंगाराम मरकाम ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।

लीलाधर राठी- सुकमा। 'मेरी परंपरा-मेरी सांस्कृतिक विरासत' विषय पर नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में सुकमा जिले के जिला पंचायत सदस्य हूंगाराम मरकाम ने गरिमामयी सहभागिता दर्ज कराते हुए पूरे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। इस राष्ट्रीय मंच पर वे प्रदेश के एकमात्र जनप्रतिनिधि रहे, जिन्होंने बस्तर अंचल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, सामुदायिक जीवन मूल्यों और सामाजिक समरसता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में देशभर से आए प्रतिनिधियों के बीच पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के संरक्षण, सांस्कृतिक धरोहर के संवर्धन, ग्राम विकास की पारंपरिक व्यवस्थाओं, युवा नेतृत्व की भूमिका और सामाजिक समरसता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान हूंगाराम मरकाम ने सुकमा सहित बस्तर संभाग की जनजातीय परंपराओं, जल-जंगल-जमीन से जुड़े जीवन मूल्यों और सामुदायिक एकता पर आधारित विकास मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर रखा।

परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन
हूंगाराम ने बताया कि, बस्तर की पहचान उसकी विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक वेशभूषा, रीति-रिवाज और सामूहिक सामाजिक संरचना से है। इन परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन ही सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला में उनकी सहभागिता ने न केवल सुकमा जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया।

क्षेत्रवासियों में गर्व और उत्साह
आयोजन के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच सांस्कृतिक संवाद, संरक्षण और सतत विकास के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया। सुकमा जिले के जनप्रतिनिधि की इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों में गर्व और उत्साह का माहौल है।

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