लीलाधर राठी - सुकमा। बस्तर की परंपराएं, आदिम संस्कृति और माटी की सुगंध अब सिर्फ स्थानीय सीमाओं तक नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ महज एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा को संजोने का सार्थक प्रयास बन गया है। इसी उत्सव में सुकमा जिले के छिंदगढ़ क्षेत्र की दीदियां अपनी पारंपरिक विधाओं और स्थानीय पेय पदार्थों के साथ विशेष आकर्षण के रूप में उभरी हैं।

छिंदगढ़ की दीदियां बनीं आकर्षण का केंद्र
संभाग स्तरीय इस महाउत्सव में किंदरवाड़ा पंचायत की स्व-सहायता समूह की सात दीदियों का स्टॉल लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है। यहां आगंतुकों को बस्तर की संस्कृति का असली स्वाद मिल रहा है- मड़िया पेज, चापड़ा आमट, लान्दा, ताड़ी, सल्फी, छिंदरस जैसे 25 से अधिक पारंपरिक पेय पदार्थ उत्सव का केंद्र बने हुए हैं।

'बस्तर पंडुम' प्रदर्शनी में छिंदगढ़ की महिलाएं Haribhoomi

पारंपरिक पेय: स्वाद और संस्कृति का अनोखा संगम
दीदियों के स्टॉल में ऐसे व्यंजन और पेय उपलब्ध हैं, जो बस्तर की जीवनशैली और प्रकृति-आधारित खानपान को दर्शाते हैं। स्टॉल की खास पेशकश-

  • औषधीय एवं शीतल पेय: तिखुर शरबत, कोदो-कुटकी पेज, सुरम
  • पारंपरिक स्वाद: चाऊर लाई पाना, धान लाई पाना, चापड़ा चटनी
  • सांस्कृतिक प्रतीक: महुआ, पसिया और अन्य विरल पेय

ये सभी पेय न केवल स्वाद का अनुभव कराते हैं, बल्कि बस्तर की परंपरा, प्रकृति और जीवनशैली के समागम को दर्शाते हैं।

सम्मान और गर्व की अनुभूति
इस आयोजन में शामिल दीदियां- रीना बेलसरिया, ज्योतिका नाग, मंजू बघेल और स्मृति बघेल ने इसे अपने लिए केवल व्यापारिक मंच नहीं, बल्कि सम्मान का अवसर मान रही हैं।
समूह की सदस्य ज्योतिका नाग का कहना है कि, हमें यहाँ आकर गर्व महसूस हो रहा है। सरकार ने हमारे रहने और खाने-पीने की बेहतरीन व्यवस्था की है। अपनी संस्कृति को इस तरह सम्मानित होते देख मन खुश है। इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार।

बस्तर पंडुम: सांस्कृतिक विरासत को संजोने का प्रयास
‘बस्तर पंडुम’ के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक कला, भोजन, पेय एवं आदिम जीवनशैली को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की पहल लगातार मजबूत हो रही है। इस आयोजन से न केवल स्थानीय महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि बस्तर की अनोखी परंपराएं भी नए पाठकों, पर्यटकों और शोधकर्ताओं तक पहुँच रही हैं।